बुटाना निवासी देवेंद्र व राजबीर के शव जब गांव में पहुंचे तो माहौल गमगीन हो गया। ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं तथा चारों तरफ सन्नाटा पसर गया। गांव में इसी बात की चर्चा थी कि आखिर ऐसा हुआ क्यों। सबके मुंह बंद थे, लेकिन आंखें एक-दूसरे से सवाल कर रही थीं। दोनों युवकों की अर्थियां एक साथ उठी तो पूरा गांव बिलख पड़ा। दोनों के अंतिम संस्कार में काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। दोनों भाइयों का एक ही चिता में अंतिम संस्कार किया गया।
रिश्ते में बहनोई लगने वाले भाजपा नेता फूल खरब द्वारा दो चचेरे भाईयों देवेंद्र व राजबीर की एक दिन पहले की गई हत्या के बाद शनिवार को दोनों के शव गांव पहुंचे तो वहां मौजूद लोग बिलख-बिलखकर रोने लगे। मृतकों के परिवार की महिलाओं की हालत काफी नाजुक थी। कई महिलाएं रोते-रोते बेहोश हो गईं।
लोगों के मन में रह रहकर यह सवाल उठ रहा था कि जमीन के टुकड़े को लेकर विवाद इतना कैसे बढ़ गया कि बहनोई ने सालों पर गोलियां चला दी। देवेंद्र पिता शमशेर के साथ रहता था। आसपास के लोगों ने बताया कि देवेंद्र उर्फ बंटी अपने काम से काम रखता था। कभी किसी पार्टीबाजी में शामिल नहीं होता था। वह अपनेे मौसेरे भाई नरेंद्र को दिल्ली एयरपोर्ट पर छोड़ने गया था, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था।
बोर्ड ने किया पोस्टमार्टम, दोनों को लगी थी तीन गोली
दोनों युवकों के शवों का पोस्टमार्टम शनिवार सुबह सामान्य अस्पताल में बोर्ड ने किया। इसके बाद शवों को अंतिम संस्कार के लिए गांव ले जाया गया। पोस्टमार्टम के दौरान चिकित्सकों को दोनों शवों से तीन गोलियां मिलीं। राजबीर कोच को सिर के अलावा छाती में तथा देवेंद्र को कंधे में गोली मारी गई थी। गोली लगने से दोनों का काफी खून बह गया, जो उनकी मौत की वजह बना।
आरोपी फूल खरब ने गोहाना में बनवाया था मकान
दो सालों को हत्या करने और तीसरे को अधमरा करने के आरोपी फूल खरब ने ही कुछ दिन पहले अपने सालों का गोहाना की एक कालोनी में मकान बनवाया था। उस समय दोनों परिवारों में गहरा प्यार था। ग्रामीणों के मुताबिक, गोहाना में मकान बनने के बाद से ही दोनों परिवारों के बीच कड़वाहट शुरू हो गई थी।
विवाद था तो भाईचारे में सुलझ सकता था
लोगों के गले यह बात नहीं उतर रही है जब कुछ दिन पहले तक दोनों पक्षों में प्यार था तो इतनी तकरार कैसे हो गई। गांववासी व सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी महाबीर कुंडू ने बताया कि उसका बेटा देवेंद्र का साथी है। देवेंद्र बहुत ही मिलनसार व सहनशील व्यक्तित्व का धनी था। देवेंद्र के पड़ोसी विकास ने बताया कि वह हमेशा आगे बढ़ने व भाईचारे की बात करता था। जबकि राजबीर मोहाली में सरकारी नौकरी करता था तो उनका किसी से कोई झगड़ा आदि नहीं था। राजबीर जब भी गांव में आता था सबको पूरा मान-सम्मान देता था। राजबीर का भाई नरेंद्र जो आस्ट्रेलिया में रहता है, वह भी काफी मिलनसार है।
बच्चों को नहीं पता, पापा के साथ क्या हुआ
मृतक देवेंद्र व राजबीर के बच्चों को कुछ नहीं पता कि क्या हुआ है। क्यों इतने लोग उनके घर आए हैं। देवेंद्र का करीब पांच साल का बेटा वंश है। मृतक भी अपने पिता का इकलौता बेटा था। राजबीर के दो बच्चों में लड़की आयुषी, लड़का आर्यन है। तीनों बच्चे एक-दूसरे के हाथ पकड़े गली में घूम रहे थे। उन्हें इस बात का अहसास भी नहीं था कि उनके सिर से पिता का साया उठ चुका है। देवेंद्र की पत्नी मीनू का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव की महिलाएं उसे चुप कराने का प्रयास करती हैं तो बिलखने लग जाती है। वह रोते हुए कहती है कि मेरे पति को क्यों मारा गया। उसका तो कोई विवाद भी नहीं था।
वंश को कौन पालेगा
गांव के लोग इस बात से ज्यादा परेशान थे कि शमशेर के घर का चिराग हमेशा-हमेशा के लिए बुझ गया है। गांव वासी बलजीत व नरेंद्र आदि का कहना है कि चूंकि देवेंद्र अपनेे पिता का इकलौता बेटा था। राजबीर के परिवार को तो नरेंद्र का सहारा मिल जाएगा। देंवेंद्र के परिवार को कौन पालेगा। कौन वंश की देखभाल करेगा तथा उसका भविष्य संवारने का काम करेगा।