सोनीपत। फसलों की सुरक्षा के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अब फीकी पड़ने लगी है। खरीफ सीजन में जिले के केवल 7,597 किसानों ने बीमा करवाया था जबकि आमतौर पर यह संख्या 20 हजार से अधिक होती थी। योजना के तहत 8,476 हेक्टेयर भूमि पर खड़ी फसल को बीमा कवर मिला है।
मौसम की वजह से होने वाले नुकसान से फसलों को सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत की थी। पहले इस योजना से काफी संख्या में किसान जुड़ते थे मगर बीमा कंपनियों और किसानों के बीच पिछले वर्षों में हुए मुआवजे को लेकर विवाद ने किसानों का विश्वास कमजोर किया है। यही कारण है कि जहां पहले खरीफ सीजन में 20 हजार से अधिक किसान योजना से जुड़ते थे वहीं इस बार उनकी संख्या काफी कम रह गई है।
प्रीमियम बढ़ोतरी बनी बड़ी वजह
सीजन में किसानों ने मक्का, कपास, धान और बाजरा जैसी फसलों का बीमा करवाया है। हालांकि, प्रीमियम की बढ़ोतरी ने किसानों पर आर्थिक बोझ डाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीमा कंपनियों और किसानों के बीच मुआवजे के विवाद और प्रीमियम में बढ़ोतरी ने योजना के प्रति विश्वास को कमजोर किया है।
बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी
कपास : 5400 रुपये से अधिक
बाजरा : 1024 रुपये प्रति हेक्टेयर
मक्का : 1089 रुपये प्रति हेक्टेयर
धान : 2124 रुपये प्रति हेक्टेयर
किसानों की संख्या में गिरावट
पहले खरीफ सीजन में औसतन : 20,000 से अधिक किसान बीमा कराते थे।
इस बार : 7597 किसान
इन फसलों को हुआ नुकसान
अधिक बारिश से कपास और बाजरे की फसल सबसे अधिक प्रभावित हुई।
धान की पैदावार पर भी असर है।
क्रॉप कटिंग से तय होगा मुआवजा
कृषि विभाग की तरफ से गठित टीमों के माध्यम से क्रॉप कटिंग प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा जिन किसानों ने सीधे शिकायत दर्ज करवाई है उनके खेतों का भौतिक निरीक्षण भी किया जा रहा है।
बीमा प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी गई है। जल्द ही क्रॉप कटिंग का काम समाप्त होगा और किसानों को बीमा कंपनियों की तरफ से मुआवजा दिया जाएगा। -डॉ. पवन शर्मा, कृषि उपनिदेशक, सोनीपत।