किसानों का मिशन यूपी व पंजाब अभी शुरू भी नहीं हुआ है और उनको लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं में कलह हो गई है। जहां संयुक्त किसान मोर्चा के नेता ने यूपी से पहले मिशन पंजाब शुरू करके किसान संगठनों के नेताओं को चुनाव लड़ने की तैयारी करने की सलाह दी है।
वहीं संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल पंजाब के संगठनों ने तुरंत आगे आकर इसका विरोध कर दिया और इसे उस नेता की निजी सोच बताते हुए चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं होने की बात कही है। इस तरह से अब चुनाव में भाजपा के खिलाफ मिशन शुरू करने से पहले ही आपसी कलह शुरू हो गई है।
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कुंडली बॉर्डर पर कहा कि किसान आंदोलन पिछले साढ़े सात महीने से चल रहा है और इसमें काफी उतार-चढ़ाव आए तो किसान भी काफी शहीद हो गए हैं। संयुक्त मोर्चा की अगली योजना मिशन उत्तर प्रदेश है, जिसमें पांच सितंबर की बड़ी रैली रखी गई है तो अन्य कार्यक्रम भी रखे गए हैं और फरवरी के आसपास चुनाव आने पर भाजपा का विरोध करके हराने की योजना है। गुरनाम चढूनी ने संयुक्त किसान मोर्चा के इस मिशन यूपी पर सवाल उठाते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा को हराने पर किसानों की बात नहीं मानी गई तो यूपी में अगर भाजपा को हरा दिया जाता है तो उसके बाद क्या गारंटी होगी कि किसानों की बात मानी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसानों की हालत केवल भाजपा सरकार ने खराब नहीं की है, बल्कि किसानों की हालत पहले से खराब है और अब कुछ ज्यादा खराब हो गई है। साढ़े सात महीने में विपक्ष का एक भी बयान नहीं आया कि उनकी सरकार आने पर कृषि कानूनों को खत्म कर देंगे और एमएसपी पर कानून बनाएंगे।
गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि सरकार बदलती रही है, लेकिन किसानों का फायदा कभी नहीं हुआ है। इसलिए मिशन उत्तर प्रदेश की जगह मिशन पंजाब चलाना चाहिए। मिशन पंजाब का प्लान बनाना पड़ेगा और पंजाब के जितने संगठन हैं, अगर वे पंजाब में चुनाव में उतर जाएं तो वहां किसानों व मजदूरों की सरकार बनेगी। जिससे वहां बदलाव करके दिखाएंगे और वहां का मॉडल अन्य सरकारों को पूरे देश में लागू करना होगा। इस तरह मिशन यूपी भाजपा को हराने के लिए है और मिशन पंजाब एक मॉडल पेश करने के लिए। इसलिए मिशन पंजाब पहले शुरू करना चाहिए तो मिशन उत्तर प्रदेश को बाद में शुरू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सर छोटूराम भी किसानों का भला इसलिए कर सके, क्योंकि सत्ता में रहते थे। उन्होंने सलाह देते हुए कहा कि इस आंदोलन में पंजाब सिरमौर है और इसलिए ही बदलाव की शुरुआत पंजाब से करनी होगी।
गुरनाम चढूनी की अपनी सोच, पंजाब के संगठनों का चुनाव का कोई इरादा नहीं : दर्शनपाल
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता गुरनाम सिंह चढूनी के मिशन यूपी की जगह मिशन पंजाब शुरू करने की बात कही गई और पंजाब के किसान संगठनों को चुनाव लड़ने के लिए कहा गया तो उससे किसान संगठनों के नेताओं में हड़कंप मच गया। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता दर्शनपाल को तुरंत ही सफाई देने के लिए आगे आना पड़ा। दर्शनपाल ने कहा कि गुरनाम सिंह चढूनी का बयान निजी है और उससे संयुक्त मोर्चा व पंजाब के 32 संगठनों में किसी का कोई मतलब नहीं है। इसके साथ ही सफाई देते हुए कहा कि पंजाब के किसी भी संगठन के नेता का अभी चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं है।