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जनता अस्पताल को निजी हाथों में दिए जाने का निर्णय निरस्त

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सोनीपत। शहर के बहुचर्चित जनता अस्पताल की नई संचालन समिति को झटका लगा है। जिला रजिस्ट्रार राजेंद्र कुमार ने चेरिटेबल ट्रस्ट के अस्पताल को निजी हाथों में दिए जाने के फैसले को निरस्त कर दिया है। साथ ही कई शपथ पत्र में कई अन्य खामियां बताते हुए इसे गैर-कानूनी करार दिया है। ऐसे में जनता अस्पताल को धर्मार्थ चलाने के पक्ष में संघर्ष कर रहे सदस्यों को इस फैसले से राहत मिली है।
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चेरिटेबल ट्रस्ट के सदस्य वरिष्ठ चार्टेड अकाउंटेट पवन गुप्ता ने बताया कि पिछले दिनों जनता चेरिटेबल ट्रस्ट सोसायटी के कुछ पदाधिकारियों ने अस्पताल को कुछ निजी लोगों के हाथों में सौंप दिया था, जिसके बाद से अस्पताल का व्यवसायिक इस्तेमाल किया जाने लगा था। उधर, विरोध कर रहे सदस्यों में शामिल कुछ पदाधिकारियों ने फर्म एवं सोसायटी मामलों के जिला रजिस्ट्रार के पास अपील दायर की थी। इस पर सुनवाई पूरी होने के बाद सोमवार को जिला रजिस्ट्रार ने फैसला सुनाते हुए अस्पताल को निजी हाथों में दिए जाने के फैसले को निरस्त कर दिया है।
फैसले में कहा गया है कि जनता रिलीफ सोसायटी यानी जनता अस्पताल को गवर्निंग बॉडी द्वारा एक निजी पार्टी को दिया गया है, जोकि नियमों के विरुद्ध है। धर्मार्थ सोसायटी का व्यवसायिक प्रयोग नहीं किया जा सकता, बल्कि इस सोसायटी को 11 चयनित सदस्यों की गवर्निंग बॉडी द्वारा धर्मार्थ ही चलाया जा सकता है। पवन गुप्ता ने बताया कि अब शीघ्र ही चेरिटेबल सोसायटी के सभी सदस्य अस्पताल को वापस लेकर इसे धर्मार्थ शुरू करेंगे।
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