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क्षतिग्रस्त एस्ट्रोटर्फ, टूटी रेलिंग व गोल पोस्ट पर अभ्यास कर रहीं बेटियां

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सेक्टर-4 के हॉकी मैदान पर चेंजिंग रूम न होने के कारण खुले मैदान में ही चेंज करती खिलाड़ी। संवाद - फोटो : Sonipat
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खेलों में विश्व पटल तक अपनी पहचान बनाने वाली बेटियों को सोनीपत में क्षतिग्रस्त एस्ट्रोटर्फ पर अभ्यास करना पड़ रहा है। मैदान की रेलिंग व गोल पोस्ट तक टूट चुका है। हॉकी खिलाड़ियों के लिए करोड़ों रुपये की लागत से सेक्टर-4 में बनाया गया एस्ट्रोटर्फ मैदान देखरेख के अभाव में खस्ताहाल होता जा रहा है। बेटियों के लिए खेल मैदान में चेंजिंग रूम से लेकर पेयजल तक की सुविधा का अभाव है। लंबे समय से बदतर हो रहे मैदान के बावजूद भी अधिकारी इस तरफ ध्यान देने की जहमत नहीं उठा रहे। जिसका खामियाजा खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा है।
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हॉकी खिलाड़ियों के लिए करीब सात साल पहले सेक्टर-4 में करोड़ों रुपये की लागत से एस्ट्रोटर्फ मैदान बनाया गया था, जिसकी करीब दो साल से हालत बदतर हो चुकी है। एस्ट्रोटर्फ की परत उखड़ रही है। गोल पोस्ट व जालियां टूट चुकी हैं। खेल परिसर में लंबी घास उगी हुई है। सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। मैदान की देखरेख करने वाला भी कोई नहीं है। प्रदेश सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए लाख दावे कर रही है, पदक विजेता खिलाड़ियों पर पैसों की बौछार भी कर रही है। लेकिन उभरते खिलाड़ियों को सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। सोनीपत से हॉकी खिलाड़ी सुमित कुमार, नेहा गोयल, नेहा वारसी व शर्मिला ओलंपिक तक पहुंची और बेहतर प्रदर्शन कर देश में हॉकी को नई पहचान दिलाई। इन खिलाड़ियों ने जिस मैदान पर हॉकी का अभ्यास किया, वही मैदान अधिकारियों की अनदेखी का शिकार हो रहा है। खिलाड़ियों व कोच का कहना है कि ऐसी स्थिति में कैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार होंगे।
न पेयजल की व्यवस्था न महिला खिलाड़ियों के लिए चेंजिंग रूम
सेक्टर-4 के खेल परिसर में तैयार एस्ट्रोटर्फ मैदान पर खिलाड़ियों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था तक नहीं है। शौचालय भी काफी दूर बनाया गया है। यही नहीं महिला खिलाड़ियों के लिए यहां चेंजिंग रूम भी नहीं बनाया गया। जिससे अभ्यास करने आने वाली महिला खिलाड़ियों को खासी परेशानियां झेलनी पड़ती है। महिला खिलाड़ियों को वॉश रूम जाना हो तो काफी दूर पैदल जाना पड़ता है। खिलाड़ियों ने यहां सुविधाएं मुहैया करवाने की मांग की है।
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क्या बोलीं खिलाड़ी
एस्ट्रोटर्फ मैदान पर सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। यहां न चेंजिंग रूम है, न पीने के पानी की व्यवस्था। वॉश रूम के लिए भी काफी दूर जाना पड़ता है। कई बार मांग के बावजूद अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे। -ईशिका, हॉकी खिलाड़ी।
एस्ट्रोटर्फ मैदान पर परत उखड़ रही है। गोल पोस्ट भी टूटे हुए हैं। चारों तरफ लगाई गई जालियां भी जगह-जगह से टूट चुकी हैं। कई बार गेंद मैदान से बाहर चली जाती है। अभ्यास के लिए भी पूरा समय नहीं मिल पाता। सविता, हॉकी खिलाड़ी।
खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने के उद्देश्य से सेक्टर-4 स्टेडियम में एस्ट्रोटर्फ मैदान बनाया गया था। देखरेख के अभाव में व्यवस्थाएं बदहाल हो रही हैं। ज्यादा कुछ नहीं महिला खिलाड़ियों के लिए चेंजिंग रूम, शौचालय व पीने के पानी की व्यवस्था भी हो जाए तो खिलाड़ियों को परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी। -संदीप सांगवान, पूर्व कोच, भारतीय हॉकी टीम
मैदान पर सुविधाएं ज्यादा नहीं है। एस्ट्रोटर्फ भी खराब हो चुका है। गोल पोस्ट टूट चुका है। पानी डालने वाला कोई नहीं है। मैदान वीरान पड़ा है। सुविधाओं की कई बार मांग कर चुके हैं, अब तो कहने में भी शर्म आने लगी है। कोई रखवाली करने वाला नहीं है। यहां कोई भी आकर खेलने लगता है। सुविधाओं के अभाव में बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं। खेल मंत्री संदीप सिंह को परिस्थितियों से अवगत कराया है। उम्मीद है जल्द समाधान होगा। प्रीतम सिवाच, गुरु द्रोणाचार्य अवॉडी एवं पूर्व कप्तान, भारतीय महिला हॉकी टीम।
सेक्टर-4 स्थित खेल स्टेडियम हुडा विभाग के पास है, अभी खेल विभाग को हैंडओवर नहीं हुआ है। हुडा विभाग ही उसकी देखरेख करता है। खेल मैदान पर कुछ सुविधाओं का अभाव है। गोल पोस्ट भी टूटा हुआ है। रिपेयर की जरूरत है। मैदान जब खेल विभाग के हैंडओवर हो जाएगा, तब सभी सुविधाएं देने का प्रयास करेंगे। हुडा विभाग से टाईअप कर खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास किए जाएंगे। -शर्मिला, जिला खेल अधिकारी, सोनीपत

सेक्टर-4 स्थित एस्ट्रोटर्फ मैदान पर गोलपोस्ट के टूटे फट्टे व उखड़ा जाल। संवाद- फोटो : Sonipat

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