हरियाणा के सोनीपत में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. संजीव आर्य ने गांव मटिंडू में युवक की गोली मारकर हत्या करने के दोषियों युवक की प्रेमिका, उसके पिता, चाचा और दो चचेरे भाइयों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
गांव मटिंडू निवासी सेवानिवृत्त फौजी समुंद्र ने 20 फरवरी, 2018 को खरखौदा थाना पुलिस को बताया था कि वह दिल्ली टेलीफोन एक्सचेंज में नौकरी करते हैं। उनका बड़ा बेटा दीपक (18) खेतीबाड़ी करता था और रात को पशुबाड़े में सोता था। वह 19 फरवरी, 2018 की रात को नौ बजे खाना खाकर सोने के लिए पशुबाड़े में चला गया था।
20 फरवरी की सुबह 5 बजे पशुओं को चारा डालने के लिए गया पशुबाड़े का मुख्य दरवाजा खुला था। अंदर जाकर देखा तो कमरे में फर्श पर दीपक का खून से लथपथ शव पड़ा था। वहां पर गोली के दो खोल पड़े होने के साथ चारपाई पर एक मैगजीन पड़ी थी।
समुंद्र ने आरोप लगाया था कि गांव के रहने वाले सुधीर की बेटी शिक्षा उनके बेटे को फोन करने के अलावा उससे मिलने के लिए आती थी। इस बारे में खुद दीपक ने उन्हें बताया था। इस पर वह अपनी पत्नी सुशीला को साथ लेकर सुधीर के घर पर जाकर पूरी बात बताई थी। लेकिन सुधीर ने उनके बेटे को ही गलत बताते हुए लड़की से दोबारा मिलने पर जान से मारने की धमकी दी थी।
समुंद्र का कहना था कि इसी रंजिश के चलते सुधीर, उसके भाई जोगेंद्र उर्फ जोगा, भतीजे राकेश व विकास ने उनके बेटे को गोली मारी है। खरखौदा पुलिस ने चारों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने के बाद 27 फरवरी को लड़की को गिरफ्तार कर लिया था। उस समय लड़की ने खुद को नाबालिग बताया था। उसने कबूल किया था कि उसका दीपक से प्रेम प्रसंग था। वह उस पर घर से भागने का दबाव बना रहा था। उसने मना किया तो दीपक ने थप्पड़ मार दिया था। जिसके चलते उसने वारदात को अंजाम दिया था।
पुलिस ने मामले में कॉल डिटेल व चूड़ी समेत कई अन्य सबूत होने की बात कही थी। हालांकि युवक के परिजनों ने पुलिस के खुलासे पर सवाल उठाए थे। उन्होंने मामले में परिवार के अन्य सदस्यों की संलिप्तता की बात कही थी। बाद में जांच के दौरान लड़की बालिग मिली।
साथ ही परिजनों के कहने पर दीपक हत्याकांड की जांच गुरुग्राम पुलिस को दी गई थी। गुरुग्राम पुलिस ने 31 जुलाई 2019 को युवती के पिता सुधीर, चाचा जोगेंद्र व चचेरे भाई बीएसएफ में जवान विकास व राकेश को गिरफ्तार कर लिया था। विकास व राकेश सगे भाई हैं और उनके पिता रघुवीर का निधन हो चुका है।
मामले की सुनवाई करते हुए बुधवार को एएसजे डॉ. संजीव आर्य ने पांचों को भादंसं की धारा 302 में उम्रकैद व 10 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। विकास को शस्त्र अधिनियम में भी दोषी माना गया। उसे शस्त्र अधिनियम में तीन साल कैद व पांच हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है।