उपमंडल के गांव बड़ी के निकट 9 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री का मामला शहर में चर्चा का विषय बना है। गन्नौर नेशनल हाईवे एक पर बड़ी गांव के पास स्थित ओंकारा एग्रो कंपनी की करीब नौ एकड़ जमीन है, जिसका बाजार भाव करोड़ों रुपये है। कंपनी के एक निवेशक कंवलजीत ने बताया कि उसने कंपनी को करीब 10 लाख रुपये दे रखे हैं। कंपनी द्वारा उसके पैसे नहीं देने को लेकर उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और उक्त जमीन को नहीं बेचने के लिए अदालत से स्टे ले लिया। उन्होंने गन्नौर के कार्यकारी नायब तहसीलदार जयवीर सिंह पर आरोप लगाया कि कंपनी मालिक से सांठगांठ कर उन्होंने गैरकानूनी रूप से रजिस्ट्री कर दी। पीड़ित पक्ष ने जिला उपायुक्त से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
क्या कहता है पटवारी
जब इस बारे में बड़ी के पटवारी नवीन से बात की गई तो बताया कि 15 अक्तूबर को उनके पास उक्त जमीन की फर्द लेने कुछ लोग आए थे। उसने उनको जो फर्द दी उसमें उन्होंने अंकित कर रखा था कि उक्त जमीन पर माननीय अदालत की तरफ से बेचने पर स्टे आर्डर है। पटवारी ने बताया कि उन्होंने तहसीलदार को उक्त कागजातों की जांच की अपील भी भेज रखी है। पटवारी ने यह भी बताया कि जो फर्द उनको दी गई थी वो असली थी लेकिन जो रजिस्ट्री में लगी हुई है वह फोटो कापी है। साथ उसके द्वारा अंकित की गई स्टे आर्डर की लाइनें गायब हैं।
रजिस्ट्री लिपिक बोली छुट्टी पर थी
सुमन दहिया ने बताया कि वो उक्त रजिस्ट्री वाले दिन छुटटी पर थी। इसलिए इस बारे में उन्हें कुछ नहीं पता।
रजिस्ट्री नियमों के तहत हुई है: नायब तहसीलदार
इस बारे में रजिस्ट्री करने वाले नायब तहसीलदार जयवीर सिंह ने बताया कि उन्होंने किसी किस्म का कोई गलत काम नहीं किया है। नियमों के तहत रजिस्ट्री की गई है। उन्होंने बताया कि उनके पास वे लोग दिल्ली हाईकोर्ट का एक रिलीज आर्डर लेकर आए थे जिसके बाद ही उन्होंने यह रजिस्ट्री की है। इसमें किसी किस्म की कोई हेराफेरी नहीं कि गई है।