फोटो : सोनीपत की ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते केंद्रीय रा
- फोटो : Samvad
सोनीपत। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और संसदीय कार्य राज्यमंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने कहा कि भारत की क्रिएटिव इकॉनमी तेजी से उभर रही है। इससे युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा होंगे। फिल्म, संगीत, गेमिंग, एनीमेशन, डिजाइन, प्रकाशन, विज्ञापन और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों में संभावनाएं बढ़ रही हैं। वह शुक्रवार को ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में आयोजित जिंदल पॉलिसी कॉन्क्लेव के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
संसदीय कार्य राज्यमंत्री ने कहा कि कि क्रिएटिव इकॉनमी में विचार, कल्पना, संस्कृति, नवाचार और बौद्धिक संपदा की अहम भूमिका है। वैश्विक जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी 3.1 प्रतिशत है। वैश्विक रोजगार में इसकी हिस्सेदारी 6.2 प्रतिशत है। भारत में करीब 5.7 करोड़ लोग सांस्कृतिक और रचनात्मक व्यवसायों से जुड़े हैं। देश की मीडिया एवं मनोरंजन अर्थव्यवस्था करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये की है।
डॉ. मुरुगन कहा कि क्रिएटिव इकॉनमी के विस्तार के साथ मजबूत कानूनी और नीतिगत ढांचा भी जरूरी है। कॉपीराइट संरक्षण और रचनाकारों को उचित पारिश्रमिक देना महत्वपूर्ण है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जिम्मेदार इस्तेमाल भी जरूरी है।
2030 तक एवीजीसी क्षेत्र में 20 लाख कुशल पेशेवरों की जरूरत
डॉ. मुरुगन ने कहा कि एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स यानी एवीजीसी क्षेत्र में 2030 तक करीब 20 लाख कुशल पेशेवरों की जरूरत होगी। युवाओं को तैयार करने के लिए सरकार इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज और एवीजीसी क्रिएटर लैब्स को समर्थन दे रही है। ये लैब्स 15 हजार स्कूलों और 500 कॉलेजों में स्थापित की जा रही हैं।
देश में 2.50 लाख स्टार्टअप
डॉ. मुरुगन ने कहा कि देश में स्टार्टअप के क्षेत्र में भी तेजी से विस्तार हुआ है। भारत में करीब 2.50 लाख स्टार्टअप शुरू हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इनमें युवाओं की बड़ी भागीदारी है। बड़ी संख्या में संस्थापक 30 वर्ष से कम उम्र के हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां युवाओं को रोजगार और उद्यमिता के अवसर देने पर केंद्रित हैं।
फोटो : सोनीपत की ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते केंद्रीय रा- फोटो : Samvad