सोनीपत। तहसीलों में भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर सरकार ने जहां रजिस्ट्री करने पर रोक लगाई है, वहीं रजिस्ट्री में खेल करने का रोजाना नया खुलासा हो रहा है। अब नया खुलासा हुआ है कि तहसील में अवैध कॉलोनियों व नोटिफाइड एरिया की जमीन की रजिस्ट्री कोई गलतफहमी में नहीं हुई है, बल्कि यह जानकारी में होने के बावजूद तहसील के अंदर रजिस्ट्री का खेल खेला गया है। क्योंकि डीटीपी लगातार अवैध कॉलोनियों की लिस्ट भेजकर बगैर एनओसी के रजिस्ट्री नहीं करने की बात कहते रहे और उसके बावजूद तहसील में बगैर एनओसी के रजिस्ट्री होती रहीं। जब टाउन प्लानिंग के निदेशक ने डीसी को पत्र भेजकर बगैर एनओसी के रजिस्ट्री होने के खेल के बारे में बताया, तब डीसी के संज्ञान में मामला आने के बाद उस पर लगाम लगाई।
तहसील में कृषि भूमि पर अवैध रूप से कॉलोनी काटकर प्लॉट की रजिस्ट्री करने के आरोप लगते रहे हैं तो इस मामले को लेकर लॉकडाउन के समय खूब धरना प्रदर्शन भी किया गया। क्योंकि लॉकडाउन के समय ही रजिस्ट्री में सबसे ज्यादा खेल किया गया और अवैध कॉलोनियों में रजिस्ट्री की गई तो खेती की जमीन में कॉलोनी काटकर प्लॉट बेचे गए। तहसीलों में रजिस्ट्री के भ्रष्टाचार का मामला सरकार के पास पहुंचा तो इसपर रोक लगा दी गई। लेकिन इस बीच ही तहसील में होने वाले भ्रष्टाचार के मामले में रोजाना नया खुलासा हो रहा है। यहां शहर के बाहर गोहाना रोड, जाहरी बाईपास, महलाना रोड, बहालगढ़ रोड, मुरथल रोड, राठधना रोड, देवडू रोड, कामी रोड, गोहाना रोड, रेवली गांव के पास सबसे ज्यादा अवैध कॉलोनी काटी गई हैं। जबकि वहां की जमीन 7ए के तहत नोटिफाइड है और वहां कॉलोनी काटने के लिए डीटीपी विभाग से सीएलयू कराना होता है। इसके अलावा 2 कनाल से कम जमीन की रजिस्ट्री के लिए डीटीपी से एनओसी लेनी होती है, लेकिन उस एनओसी के बिना ही तहसील में खुलेआम रजिस्ट्री करने का खेल चल रहा था। इस तरह की रोजाना 5-10 रजिस्ट्री तहसील में होती थी, जिसका पता चलने पर डीटीपी ने उन जगहों व जमीन का खसरा नंबर की लिस्ट तहसील में भेजी थी। जहां अवैध कालोनियां काटी गई है और वहां की रजिस्ट्री गलत तरीके से हो रही थीं। उसके बावजूद भी तहसील के कर्मी व अफसर घपला करने से बाज नहीं आए और उन अवैध कॉलोनियों व नोटिफाइड एरिया की रजिस्ट्री का खेल चलता रहा। जिसके बाद यह मामला टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के निदेशक केएम पांडुरंग की जानकारी में आया तो इसको लेकर डीसी को पत्र भेजा गया। जिसमें बताया गया कि डीटीपी की एनओसी के बिना लगातार रजिस्ट्री हो रही है। डीसी श्यामलाल पूनिया के संज्ञान में मामला आने के बाद यह बड़ा खेल उजागर हुआ और एनओसी के बिना रजिस्ट्री पर रोक लगाई गई। जबकि उससे पहले सैकड़ों रजिस्ट्री करके बड़ा घपला किया गया है, जिसकी जांच होने पर बड़ा खुलासा होगा।
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स्टांप ड्यूटी मामले की जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी
तहसील अफसरों पर एक कॉलोनी में स्टांप ड्यूटी में घपला करने का आरोप लगा है। जमीन खरीद-फरोख्त में कम रुपये के स्टांप लगाने के बावजूद रजिस्ट्री कर दी गई और इसके लिए तहसील के कर्मी व अफसर जिम्मेदार हैं। इस तरह से स्टांप ड्यूटी घपले की शिकायत होने पर डीसी ने डीआरओ राजकुमार को जांच सौंपी थी, जिसमें डीआरओ ने अपनी जांच रिपोर्ट डीसी को सौंपी है। डीसी श्यामलाल पूनिया ने रिपोर्ट देखने के बाद उच्च अधिकारियों को भेजने की बात कही है।
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डीटीपी की एनओसी के बिना रजिस्ट्री होने के बारे में निदेशक का पत्र आने के बाद पता चला तो उसी समय निर्देश जारी कर दिए गए थे। इसके साथ ही डीटीपी व नगर निगम को एक-एक पटवारी तहसील में बैठाने के लिए पत्र लिखा गया था। इसके अलावा स्टांप ड्यूटी मामले में जांच रिपोर्ट को उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा।
-श्यामलाल पूनिया, डीसी