चार साल होता रहा फर्जी भुगतान
फर्जी बिलों से भुगतान का खेल चार साल से चल रहा रहा था। प्रत्येक वित्तीय वर्ष में आय व्यय का मिलान होता है, लेकिन इसके बाद भी स्कूलों में फर्जीबाड़ा चलता रहा यह बात हैरान करने वाली है। ऐसे में सवाल बड़े अफसरों पर भी उठते हैं। आरोपी लिपिक ने जुलाई 2021 से जून 2025 के बीच फर्जी बिल बनाए। महिमा, दिव्या, निशांत अरोड़ा, भूपेन्द्र कुमार, तृप्ता, संजय कुमार, पूनम और कृष्णा के बैंक खातों में फर्जी बिलों के भुगतान की धनराशि ऑनलाइन ट्रांसफर की गई। अकबरपुर बारोटा स्कूल में भी 20 फर्जी सैलरी एरियर बिल बनाए गए और 32 लाख 96 हजार 909 रुपये की सरकारी रकम का गबन किया गया।
प्रिंसिपल की ओर से शिकायत दी गई है कि लिपिक ने करोड़ रुपये से ऊपर का घोटाला किया है। शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है।
-रविंद्र कुमार पुलिस प्रवक्ता, सोनीपत
लाखों रुपये के भुगतान का संदेह होने के बाद रिकॉर्ड की जांच की गई तो नौ लाख रुपये के फर्जी बिलों का भुगतान कोषागार अधिकारी को सूचना देकर रुकवा दिया गया है।
- भारती, प्रधानाचार्य पीएम श्री माध्यमिक विद्यालय स्कूल
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