सोनीपत। जिले में लोगों और अधिकारियों की लापरवाही से कोरोना संक्रमण पर काबू पाना मुश्किल होता जा रहा है। जिन पर संक्रमण को फैलने से रोकने के साथ ही मरीजों के उपचार की जिम्मेदारी है, वहीं, लापरवाही बरत रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने केवल अपनी जिम्मेदारी को कोरोना जांच के सैंपल लेने तक सीमित कर लिया है। वहीं जब कोई संक्रमित मिलता है तो उसे सूचना तक नहीं दी जाती। वह कई दिन बाद ऑनलाइन अपनी रिपोर्ट देखते हैं तो उनको संक्रमित होने का पता चलता है। दो दिन में ऐसे करीब 10 मामले सामने आ चुके हैं। संक्रमित होने की जानकारी नहीं होने पर यह मरीज बाहर घूमते हैं, जिससे और लोग संक्रमित हो रहे हैं।
कोरोना के लक्षण होने पर जब कोई नागरिक अस्पताल में जाता है तो वहां उसका सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिया जाता है। उसके बाद उसे यह हिदायत तक नहीं दी जाती है कि उसे जांच रिपोर्ट आने तक घर में एकांतवास में रहना है। जब भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट आती है और वह संक्रमित मिलता है तो मरीज के घर या मोबाइल पर सूचना तक नहीं दी जाती है। मरीज को उस समय अपनी जांच रिपोर्ट का पता चलता है, जब वह कई दिन तक इंतजार करने के बाद खुद ही उसे ऑनलाइन चेक करता है।
केस- 1
वेस्ट रामनगर का रहने वाला एक युवक इस तरह ही बुखार, खांसी, जुकाम होने पर अस्पताल में गया। जहां चिकित्सक ने उसे यह कहकर दवाई थमा दी कि उसे मौसम बदलने के कारण ऐसा हुआ है। जब वह तीन दिन तक ठीक नहीं हुआ तो वह दोबारा अस्पताल गया और सैंपल जांच कराई। सैंपल देने के तीन दिन बाद जब अस्पताल से कोई सूचना नहीं मिली तो उसने ऑनलाइन जांच रिपोर्ट देखी तो वह हैरान रह गया क्योंकि रिपोर्ट पॉजिटिव थी।
केस-2
मुरथल रहने वाले एक परिवार की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद भी उनको सूचना नहीं दी गई। जब उन्होंने खुद ही ऑनलाइन देखा तो उनको चार दिन बाद खुद के संक्रमित होने का पता चला। जबकि उनकी जांच रिपोर्ट एक दिन बाद ही अस्पताल में पहुंच गई थी। यह मामला जब अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया तो वह अपना पल्ला झाड़ते हुए उल्टा मरीजों पर ही पूरा मामला डालने लगे। अधिकारियों ने पता व मोबाइल नंबर गलत होने की स्थिति में सूचना नहीं दे पाने की बात कही। जबकि जिन दो लोगों के उदाहरण दिए गए हैं, उनका पता भी सही था और मोबाइल नंबर भी सही लिखवाया गया था।
किसी का पता व मोबाइल नंबर गलत होता है तो ऐसे में अस्पताल से उनसे संपर्क नहीं हो पाता है। जिनका पता व मोबाइल नंबर सही होता है, उनसे रिपोर्ट आने पर तुरंत संपर्क किया जाता है। अगर इस तरह का मामला है तो उसे दिखवा लिया जाएगा। - डॉ. दिनेश छिल्लर, नोडल अधिकारी कोरोना