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Sonipat News: राजलूगढ़ी खेल स्टेडियम की व्यवस्थाएं बदहाल, बिजली पानी तक की सुविधा नहीं

Wed, 18 Mar 2026 02:37 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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खेल मैदान में बना मैनहोल का टूटा स्लैब।  संवाद
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गन्नौर। राजीव गांधी खेल स्टेडियम राजलूगढ़ी की व्यवस्थाएं बदहाली की कगार पर पहुंच चुकी हैं। बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव खिलाड़ियों और स्थानीय कोचों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। स्टेडियम के शौचालय पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं जिसके चलते फुटबाॅल ट्रेनिंग के लिए आने वाली लड़कियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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शौचालय न होने से कई खिलाड़ी अभ्यास सत्र बीच में ही छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। स्टेडियम के कमरों, दरवाजों, खिड़कियों और शीशों की हालत भी बेहद खराब हैं। कई खिड़कियों के शीशे टूटे पड़े हैं जबकि इंडोर स्टेडियम में लगे अधिकांश पंखे क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। हालात इतने खराब हैं कि गर्मी के मौसम में खिलाड़ियों को बिना पंखों के अभ्यास करना पड़ता है। स्टेडियम में सुरक्षा और रखरखाव की कमी भी साफ झलकती है।


सात महीने पहले हुई थी सफाई

राजीव गांधी खेल स्टेडियम राजलूगढ़ी की सफाई और मरम्मत सात महीने पहले खेल विभाग ने करवाई थी लेकिन उसके बाद से व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो चुकी है। वर्तमान स्थिति देख कर ऐसा लगता है कि विभागीय निगरानी बिल्कुल नहीं हो रही।
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स्टेडियम में तीन सरकारी व एक निजी कोच

स्टेडियम में खेल विभाग की ओर से सरकारी कोच नियुक्ति की गई हैं। स्टेडियम में फुटबाॅल कोच श्रेया हुड्डा, फुटबाॅल कोच रीना व बाक्सिंग कोच सविता बच्चों को ट्रेनिंग देने आती हैं। उनके अलावा भोगीपुर गांव के सुनील राठी निशुल्क लड़कियों को फुटबाॅल की कोचिंग देते हैं और उन्हें किट भी निशुल्क उपलब्ध करवाते हैं। स्टेडियम की देखरेख के लिए एक चौकीदार भी तैनात किया गया है।


निजी कोच अपने निजी खर्च से करवाते हैं मैदान की सफाई

निजी कोच सुनील राठी अपने खर्चे पर मैदान की सफाई करवाकर उसे अभ्यास योग्य बनाए रखे हुए हैं ताकि बच्चों की ट्रेनिंग प्रभावित न हों। उन्होंने बताया कि विभाग से स्टेडियम की मरम्मत और सुविधाएं दुरुस्त कर नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने की मांग की है। उम्मीद है कि जल्द ही बजट जारी होगा और व्यवस्था में सुधार होगा।


बच्चों का खेल भविष्य इस स्टेडियम से जुड़ा है। इसलिए अपने खर्चे से मैदान की सफाई करवाते हैं। खेल विभाग तुरंत मरम्मत कर सुविधाएं बहाल करे और नियमित रखरखाव की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। - सुनील राठी, निजी कोच


शौचालय उपयोग करने लायक ही नहीं हैं। कई बार हमें अभ्यास बीच में छोड़कर जाना पड़ता है। लड़कियों के लिए यह बेहद असुविधाजनक है।
- रितिका, खिलाड़ी

पानी की व्यवस्था न होने से अभ्यास करना मुश्किल हो जाता है। इंडोर में पंखे भी नहीं चलते, इससे कई बार माहौल दमघोंटू हो जाता है। विभाग को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
- सरगम, खिलाड़ी

खेल मैदान में बना मैनहोल का टूटा स्लैब।  संवाद

खेल मैदान में बना मैनहोल का टूटा स्लैब।  संवाद

खेल मैदान में बना मैनहोल का टूटा स्लैब।  संवाद

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