सोनीपत। सर्दी से राहत नहीं मिल पा रही है। कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। बुधवार देर रात से ही कोहरा छा गया था। हालांकि, सुबह चली हवा ने कोहरे से निजात दिला दी। कोहरा छटने के बाद चली बर्फीली हवा ने लोगों को ठिठुरने पर मजबूर कर दिया।
बुधवार रात करीब साढ़े दस बजे से ही कोहरा छाने शुरू हो गया था। दृश्यता कम होने के कारण नेशनल हाईवे सहित प्रमुख संपर्क मार्गों पर वाहनों की गति धीमी पड़ गई। हालांकि, सुबह सात बजे के बाद शहरी इलाकों से कोहरा छट गया। साढ़े दस बजे धूप निकली पर बेअसर रही। वीरवार को दिन में करीब 11 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली।
सरगथल क्षेत्र में न्यूनतम तापमान 2.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अधिकतम तापमान 17.6 डिग्री सेल्सियस रहा। ठंड से गलन बढ़ गई है।बेसहारा लोगों के लिए रैन बसेरों में भी कोहरे और ठंड के चलते चुनौतियां बनी रहीं।
प्रदूषण मापक यंत्र बंद
जिले में वायु गुणवत्ता की जानकारी देने वाला एक्यूआई मापक यंत्र खराब पड़ा है। इसके चलते लोगों को यह पता नहीं चल पा रहा कि वह किस स्तर की प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं। अस्पतालों में सर्दी, जुकाम और बुखार के मरीजों की संख्या में इजाफा देखने को मिल रहा है। चिकित्सक डॉ. जसवंत पूनिया ने बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
खेती और पशुपालन पर भी असर
कड़ाके की ठंड और कोहरे का असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। कृषि विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र के अनुसार ठंड गेहूं की फसल के लिए लाभदायक होती है लेकिन सब्जी को नुकसान पहुंचा सकती है। वहीं, पशुपालक भी ठंड से चिंतित हैं। पशुओं को बचाने के लिए तबेलों में तिरपाल और टाट का प्रबंध किया जा रहा है। डॉ. राजबीर नैन का कहना है कि तापमान में अचानक आई गिरावट पशुओं के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है। इससे दूध भी कम हो सकता है।
मौसम में बदलाव की संभावना है। अब आसमान में बादल छा सकते हैं। इससे अधिकतम व न्यूनतम तापमान में वृद्धि संभव हैं। हालांकि, ठंड से निजात नहीं मिलेगी। -डॉ. प्रेमदीप, मौसम विशेषज्ञ, केवीके सोनीपत।