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बालक की जिद से खुले दरवाजे, अंदर लटके मिले शव

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कमेटी डालने के कारोबार की भयावहता शुक्रवार को सेक्टर-23 में दिखी। हाऊसिंग बोर्ड के मकान 180 में जगवीर, उसकी पत्नी सुदेश और बेटी प्रियंका के शव छत पर लगे एक पंखे से चुन्नी से लटकते मिले तो आस-पड़ोस में हड़कंप मच गया। घर में कुनबा घाणी हो गई है, इसका भेद सुबह साढ़े 9 बजे के करीब तब खुला जब पड़ोस में रहने वाले साढ़े 3 साल के बालक ने अपने नाना जगवीर के घर जाने की जिद की।
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घर के दरवाजे अंदर से बंद देखकर चिंता हुई और किसी तरह से घर के दरवाजे खोले गए तो दंपती और उनकी बेटी पंखे पर लटके मिले। इससे पहले दूध देने वाला भी बिना दूध दिए ही लौट गया, क्योंकि दरवाजा खटखटाने पर भी कोई जवाब नहीं आया था।

आस-पड़ोस के लोगों ने बताया कि रात को घर में ऐसी कोई हलचल नहीं हुई, जो कि संदिग्ध लगे। घटना की सूचना पर पहुंचे जगवीर के भाई के दामाद सुरेश ने बताया कि उनकी रात को 11 बजे जगवीर से बात हुई थी, तब ऐसा कुछ नहीं लगा कि वे इतना बड़ा कदम उठाने वाले हैं। जगवीर ने उनको बताया था कि वह सुबह डयूटी पर जाएगा, जबकि पत्नी और बेटी गांव पुरखास जाएंगी।
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चैन के साथ छूटी पढ़ाई भी
कमेटी का यह कारोबार अकेले जगवीर के परिवार तक ही सीमित नहीं है। जगवीर की पत्नी सुदेश पिछले डेढ़ साल से इस कारेाबार से जुड़ी थी। यह एक चेन की तरह चल रहा था। आस पास के ही 40 के करीब व्यक्ति इससे जुडे थे। इसमें सदस्यों से हर महीने 10 से 25 हजार रुपए तक लिए जा रहे थे। अब कमेटी की रकम 40 लाख रुपए के करीब थी। इसी रकम ने जगवीर के फलते-फूलते परिवार को मौत के रास्ते पर धकेल दिया। पैसे मांगने वाले सुबह ही तंग करने लगते थे। बेटी प्रियंका की पढ़ाई भी इससे छूट गई थी।


कमेटी का धंधा हर तरफ
लाटरी से कमेटी का अवैध कारोबार तेजी के साथ चल रहा है। पूरा जिला इसमें जकड़ा हुआ है। इस कारोबार को चलाने वाले खूब फल-फूल रहे हैं। वहीं लालच में आकर इसमें पैसा लगाने वाले भी खूब पिस रहे हैं। आलम यह है कि इस धंधे में लाटरी डालने वाले लोग ब्याज पर पैसा लगाकर अपनी किस्त चला रहे हैं। हर माह लाटरी खुलने से पहले उन्हें किस्त देनी होती है। वरना उनका नंबर खुलने वाली लाटरी में नहीं डाला जाता। कहीं से भी करे लोग महीने में किस्त का जरूर इंतजाम करते हैं।

जिसकी लाटरी निकलती है, उसकी बल्ले-बल्ले रहती है, बाकी मायूस रहते हैं। कमेटी में किसी भी काम में लगाने के लिए कमेटी का कोई भी सदस्य जरूरत पड़ने पर मोटी रकम कमेटी से उठा लेता है। बाद में कमेटी उठाने वाले को पूरी रकम जमा करनी होती है। फायदा यह रहता है कि कमेटी उठाने पर कोई ब्याज नहीं देना होता। कमेटी उठाने वाले कई लोग भी बर्बादी की राह पर चल पडे़ हैं। कई लोगों के घर उजड़ने के कगार पर खड़े हैं। लोगों ने इस अवैध कारोबार पर रोक लगाने की मांग की है।
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