सोनीपत। कर्मचारी का तबादला कराने के नाम पर रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किए गए उपायुक्त के निजी सहायक शशांक शर्मा के विरुद्ध एंटी करप्शन ब्यूरो ने कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। रिश्वत के खेल में शशांक के साथ उपायुक्त कार्यालय व एसडीएम कार्यालय के दो कंप्यूटर ऑपरेटरों को भी एसीबी ने गिरफ्तार किया था। लेनदेन से प्रमाण मिलने के बाद इनके खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल हुई है।
एंटी करप्शन ब्यूरो ने 19 जून को उपायुक्त कार्यालय में छापा डालकर उपायुक्त के निजी सहायक शशांक शर्मा को साढ़े तीन लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। एक कर्मचारी ने शिकायत की थी कि शशांक ने उसे तहसील राई में आरसी क्लर्क के पद पर लगवाने के लिए 5 लाख रुपये की मांग की थी।
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उसने शशांक को डेढ़ लाख रुपये पहले ही दे दिए थे और बकाया साढ़े लाख रुपये की मांग बाद में की गई। शिकायत मिलने पर एंटी करप्शन ब्यूरो रोहतक यूनिट की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से शशांक को साढ़े तीन लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया था।
शशांक को रिमांड पर लेकर उसके बैंक खातों और यूपीआई से लेनदेन का डाटा निकाला तो पता चला कि वेतन से 50 गुणा अधिक बैंक खातों व यूपीआई से लेनदेन हुआ है। रिश्वत के खेल में उपायुक्त कार्यालय में नियुक्त कंप्यूटर ऑपरेटर अनूप सिंह एवं एसडीएम कार्यालय में नियुक्त कंप्यूटर ऑपरेटर राजेश कुमार भी शामिल हैं।
फोन-पे व गूगल-पे के माध्यम से शशांक शर्मा से दोनों आरोपियों का लाखों का रुपये का लेनदेन हुआ है। तकनीकी प्रमाण मिलने के बाद एसीबी ने कंप्यूटर ऑपरेटर अनूप सिंह एवं राजेश कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया था। करीब ढाई महीने तफ्तीश के बाद एसीबी ने कोर्ट में तीनों गिरफ्तार आरोपियों के विरुद्ध मजबूत साक्ष्य संकलित कर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है।
उपायुक्त कार्यालय में तैनात कर्मचारी जितेंद्र को राई तहसील में रजिस्ट्री क्लर्क के रूप में ट्रांसफर कराने के नाम पर शशांक शर्मा ने रिश्वत मांगी थी। जितेंद्र ने रिश्वत की एक किश्त डेढ़ लाख रुपये जमा भी कर दी थी। इसी बीच उपायुक्त का स्थानांतरण हो गया। आरोपी जितेंद्र पर साढ़े तीन लाख रुपये देने का दबाव बना रहा था। इस पर जितेंद्र ने एंटी करप्शन ब्यूरो में शिकायत कर दी थी।