सोनीपत। ग्रामीण अंचल की अधिकतर सड़कों व संपर्क मार्गों पर बाहर निकली पेड़ों की बेतरतीब टहनियां वाहन चालकों की राह रोक रही हैं व हादसे को न्योता दे रही हैं। सड़काें पर सफेद पट्टी से बाहर निकली पेड़ों की टहनियाें के चलते अचानक वाहन डगमगाने से अनहोनी दुर्घटना भी घटित हो सकती है।
कई जगह धूमिल संकेतक भी वाहन चालकों के लिए मुसीबत बन रहे हैं। प्रशासन की ओर से अभियान शुरू करने के चार माह बाद भी सड़कों पर वही स्थिति बनी है। सावन में पेड़ों की शाखाएं तेजी से बढ़ती हैं।
गांव कामी, ककरोई रोड, रोहतक रोड, रोहट, तिहाड़, भठगांव, मोहाना रोड, महलाना, पैरलल नहरों के बीच बने मार्ग, बहालगढ़ रोड, सोनीपत-खरखौदा रोड, गोहाना-सोनीपत मार्ग, हुल्लाहेड़ी सहित कई संपर्क मार्गों पर पेड़ों की टहनियां सड़क के साइड पर लगी सफेद पट्टी से बाहर आ चुकी हैं।
इसके अलावा अधिकतर सड़काें पर संकेतक का अभाव भी है। जिन सड़कों पर संकेतक लगाए गए हैं वह पेड़ों की शाखाओं में छिप चुके हैं व कहीं धुंधले हो चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की अधिकतर सड़कों पर संकेतक चिह्न नहीं हैं। सड़कों के सुधार पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यातायात सुविधा संबंधी सुधार नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में वाहन चालकों की परेशानी बढ़ सकती है।
ठंडे बस्ते में सिमटा अभियान
प्रशासन ने 28 मार्च को अभियान की शुरुआत करते हुए संबंधित विभागों को सड़कों व खाली जगहों पर उगे पौधों को कटवाते रहने के निर्देश दिए थे। विभागों ने अभियान में कुछ दिन रूचि भी दिखाई, इसे बाद जागरूकता ठंडे बस्ते में सिमटकर रह गई। संबंधी विभागों के अधिकारी मामले में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। उधर सड़कों किनारे निकलती पेड़ों की टहनियां हादसों का कारण बन सकती हैं।
अगर विभाग की किसी सड़क पर पेड़ों की टहनियां सड़कों पर आई हैं या सांकेतिक चिह्न झाड़ियों में छिप गए हैं तो जल्द उन्हें हटवाया जाएगा। सड़कों पर यातायात सुरक्षा संबंधी नियमों को ध्यान में रख जल्द कार्य करवाया जाएगा।
-पंकज गौड़, कार्यकारी अभियंता, लोक निर्माण विभाग