वार्ड उसके लिए डिलीवरी रूम बन गया था, फर्श ही उसके लिए बेड हो गया था। इन्हीं हालातों में गांव जाटी की रहने वाली अंजना बच्चे को जन्म दे रही थी।
सोमवार दोपहर के समय का यह नजारा जिसने भी देखा, वो सिर्फ अस्पताल प्रशासन को कोसता नजर आया। फर्श पर बच्चे को जन्म देने की बात सुनकर आनन-फानन में मौके पर ही तीन-चार स्टाफ नर्स तो पहुंचीं, लेकिन उन्होंने भी डिलीवरी की बाकी की प्रक्रिया फर्श पर ही पूरी कराई।
अस्पताल प्रशासन की उदासीनता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिस समय पीड़िता को दर्द हुआ, उस समय वार्ड में कोई स्वास्थ्य कर्मी मौजूद नहीं था।
जब वह मदद के लिए बिस्तर से उठकर चली तो फर्श पर ही गिर गई। दूसरी ओर लापरवाही का इतना बड़ा मामला सामने आने के बाद स्टाफ नर्स जहां अपना बचाव करती घूम रही हैं, वहीं डॉक्टर पूरे मामले से पल्ला झाड़ रहे हैं।
गांव जाटी की रहने वाली अंजना को दर्द की शिकायत के बाद सोमवार को सामान्य अस्पताल के प्रसूति विभाग में भर्ती कराया गया था। लगभग 11 बजे के आसपास डिलीवरी से पूर्व वार्ड में मौजूद नर्स उसे ग्लूकोज चढ़ाकर किसी काम से वार्ड से बाहर चली गई।
लगभाग पांच मिनट बाद अंजना को तेज दर्द की शिकायत हुई। आसपास किसी स्वास्थ्य कर्मी को न पाकर अंजना ने बाहर निकलकर खुद ही मदद मांगने की सोची।
इसी सोच के साथ वह बिस्तर से उठकर चली ही थी कि दर्द अचानक बढ़ गया और वह फर्श पर ही गिर पड़ी और तेज दर्द से कराहने लगी। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो महिला तेज दर्द से कराह रही थी, लेकिन मौके पर कोई स्वास्थ्यकर्मी नहीं था।
जब डिलीवरी प्राकृतिक रूप से शुरू ही हो चुकी थी तभी सूचना पर स्टाफ नर्स दौड़ती आईं और प्रसव में जुट गईं। बाद में अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी वहां आकर डिलीवरी में सहायता करने लगे।
जब सब कुछ सही सलामत रहा और महिला ने बच्चे को जन्म दे दिया तब जाकर वहां मौजूद सभी महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने राहत की सांस ली। फिलहाल जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। दोनों को 48 घंटे तक डॉक्टरों की निगरानी में रखने के लिए कहा गया है।
जान पर बन सकती थी लापरवाही
जिस तरह से सोमवार को सामान्य अस्पताल में फर्श पर डिलीवरी कराई गई है। उससे स्वास्थ्य विभाग पर कई सवाल खड़े होते हैं। उनकी यह लापरवाही जच्चा और बच्चे की जान पर भी भारी पड़ सकती थी।
ठंड के मौसम में फर्श की ठंडक से जच्चा और बच्चा दोनों को नुकसान पहुंचना लाजिमी है। अगर स्वास्थ्यकर्मियाें जरा सी देरी करते तो शायद जच्चा या बच्चा में से किसी एक को बचाना मुश्किल हो जाता।
डिलीवरी के बाद वार्ड में बना चर्चा का विषय
डिलीवरी के तुरंत बाद प्रसूति वार्ड में यह चर्चा का विषय बन गया। अधिकांश महिलाओं का कहना था कि यदि स्वास्थ्यकर्मी पहले से चौकस होती और महिला की वास्तविक स्थिति से अवगत होती तो यह नौबत नहीं आती।
कुछ महिलाओं का कहना था कि प्रसव पूर्व महिलाओं पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। ऐसी स्थिति में थोड़ी सी ढिलाई बरतने पर महिला का प्रसव कभी भी हो सकता है।
स्वास्थ्य विभाग का दोहरा चेहरा
दो दिन पूर्व ही नाथूपुर गांव की रहने वाली संगीता के शरीर में खून की कमी मिलने के बाद डॉक्टरों को उन्हें दो यूनिट खून चढ़ाना पड़ा था। इसके बाद महिला ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देकर इसके लिए डॉक्टरों की प्रशंसा की थी, लेकिन दो दिनों बाद ही अस्पताल में महिला का फर्श पर बच्चे का जन्म देना फिर से कहीं न कहीं स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही को उजागर करता है।
इस घटना को लेकर अभी तक किसी ने उनके पास कोई सूचना नहीं पहुंचाई है। यदि इस तरह की बात है तो वह देखेंगे कि उस दौरान किसकी ड्यूटी थी। इस बारे में पूछताछ करेंगे। साथ ही महिला मरीज से भी इस बारे में पूछताछ की जाएगी। इसके लिए जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. सीपी अरोड़ा, चिकित्सा अधीक्षक, सामान्य अस्पताल, सोनीपत।