जिला बार में वकीलों के बीच की राजनीति आठ माह में काफी बदल गई। मई माह में जहां अनूप सिंह दहिया की सदस्यता को लेकर ही सवाल उठाए जा रहे थे, वहीं शुक्रवार को हुए चुनाव में चौधर का ताज हासिल करने में कामयाब हो गए। उन्होंने कड़े मुकाबले में 20 वोटों से जीत हासिल की। जानकारों की मानें तो दहिया की जीत में वरिष्ठ वकीलों के साथ युवा वकीलों की भी अहम भूमिका मानी जा रही है।
नियमों के तहत एक साल बाद बार के चुनाव होते हैं। इसके चलते इससे पहले प्रधान रहे भगत सिंह मलिक का कार्यकाल अप्रैल माह में पूरा हो गया। इसके चलते मई माह में चुनाव होना था। इसके लिए नामाकंन की प्रक्रिया तक शुरू हो गई, लेकिन अनूप सिंह दहिया की सदस्यता पर यह कहकर सवाल उठाए गए कि दहिया के खिलाफ बार कौंसिल में शिकायत है। साथ ही हाईकोर्ट में केस चल रहा है। जब तक मामले का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक वह चुनाव नहीं लड़ सकते। वकीलों के बीच काफी वादविवाद हुआ था। बाद में पंजाब और हरियाणा बार कौंसिल की हिदायत, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के चुनाव को लेकर दिए गए फैसले के चलते चुनाव रद्द हो गए। तय हुआ कि दिसंबर महीने में चुनाव कराए जाएंगे। बीच का यह समय अनूप दहिया के लिए बड़ा बदलाव वाला रहा। बार में जहां वकीलों के बीच अपनी पकड़ को मजबूत करने में कामयाब रहे, वहीं हाईकोर्ट में भी पुराने विवाद से राहत मिल गई। अब कड़ी टक्कर में दो बार प्रधान रहे कृष्ण कुमार मलिक को हराने में कामयाब रहे।
सस्ते चैंबर दिलवाना दहिया के लिए रहेगा चुनौती
बार चुनाव में अनूप सिंह दहिया ने युवा वकीलों से वादा किया था कि न केवल उन्हें चैंबर दिलाए जाएंगे, बल्कि दर भी सस्ती रहेगी। साथ ही जो चैंबर बने हैं, उनके लिए ज्यादा पैसे जमा कराने की बात सामने आ रही है। उसकी भी जांच कराएंगे। यहीं कारण रहा कि युवा वकीलों ने दहिया की जीत में कारगर भूमिका अदा की। हालांकि कृष्ण मलिक मात्र 20 वोटों से ही हारे हैं। जबकि अनिल ढुल को भी 131 वोट मिली हैं।
बार में दहिया वकीलों का दबदबा
जिला बार के जातिगत समीकरणों पर नजर डाले तो 800 वोटों में से आधे के करीब जाट वकील हैं, उनमें भी ज्यादा दहिया गोत्र के वकील हैं। यह समीकरण भी अनूप दहिया की जीत में अहम रहा। इतना ही नहीं, 1991 में नफे सिंह दहिया, 2008-09 में खुद अनूप दहिया और 2012-13 में राजीव दहिया प्रधान बनने में कामयाब रहे हैं। वहीं, कृष्ण कुमार मलिक की पकड़ अब भी कायम है। खुद मलिक 2009-10, 2010-11 में प्रधान और 1989-90 और 1990-91 में सचिव चुने गए थे।
लगातार दूसरी बार गैर जाट बना सचिव
बार में चाहे जाट समुदाय के वकीलों की संख्या ज्यादा है, लेकिन सचिव पद पिछले चार मुकाबलों में से तीसरी बार गैर जाट के खाते में गया है। 2012-13 में रूपा कौशिक, 2014-15 में जयदीप कौशिक और अब 2015-16 में अनिल भारद्वाज सचिव चुने गए हैं। बीच में 2013-14 में अजय दहिया जीतने में कामयाब रहे थे।
बलजीत आंतिल ने जीता एकतरफा मुकाबला
बार चुनाव में उपप्रधान को लेकर सबसे ज्यादा पांच उम्मीदवार मैदान में थे। बलजीत आंतिल ने चौंकाते हुए एकतरफा मुकाबले में सबसे ज्यादा अंतर से जीत हासिल की। दूसरे नंबर रहे प्रत्याशी सुंदर सिंह से 138 वोट ज्यादा हैं। आंतिल जहां अकेले 300 से थोड़ा कम 294 वोट हासिल करने में कामयाब रहे, जबकि दूसरे चारों प्रत्याशियों में से कोई भी 200 का आंकड़ा भी नहीं छू सका।
यह होगी जिला बार की कार्यकारिणी
अनूप दहिया प्रधान, बलजीत आंतिल उप प्रधान, अनिल भारद्वाज सचिव, सुनील दहिया कोषाध्यक्ष और प्रवीण कुमार सहसचिव होंगे। पहले तीन पदों पर जहां वोटिंग हुई, जबकि कोषाध्यक्ष व सह सचिव सर्वसम्मति से पहले ही निर्वाचित हो चुके हैं।
अगले सप्ताह पद ग्रहण समारोह
चुनाव अधिकारी सुखबीर गुलिया ने बताया कि जल्द नई कार्यकारिणी की मीटिंग होगी, जिसमें पद ग्रहण समारोह की तिथि पर विचार-विमर्श किया जाएगा। संभवत अगले सप्ताह बार रूम में समारोह करके प्रधान, उप प्रधान, सचिव, कोषाध्यक्ष व सह सचिव को उनके पद की बार एसोसिएशन के नियमों के तहत जिम्मेदारी दी जाएगी।