कोर्ट स्टे के बावजूद बड़ी के पास नौ एकड़ विवादित जमीन की रजिस्ट्री करने के मामले में तत्कालीन नायब तहसीलदार के साथ रजिस्ट्री क्लर्क की भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। क्योंकि पूर्व एसडीएम सुधांशु गौतम की रिपोर्ट के बाद अब गन्नौर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच पड़ताल शुरू कर दी है।
दिल्ली निवासी कंवलजीत ने जिला उपायुक्त के सामने गुहार लगाते हुए आरोप लगाया था कि डिवाइन सिटी के सामने स्थित 5 एकड़ 7 कनाल 9 मरले जमीन की गलत तरीके से रजिस्ट्री की गई है, जिसमें उसका भी हिस्सा था। उसका कहना था कि जमीन पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से स्टे लिया गया था। जमीन पर स्टे के बावजूद उसके पार्टनर ने कार्यकारी नायब तहसीलदार जयवीर मलिक, पटवारी कुलदीप तथा रजिस्ट्री क्लर्क के साथ सांठगांठ कर नियमों की अनदेखी करते हुए रजिस्ट्री करा ली। कंवलजीत ने जिला उपायुक्त से निष्पक्ष जांच की मांग की थी जिसकी प्रशासनिक जांच करने के बाद जिला उपायुक्त ने तीनों के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश जारी किए।
जिला उपायुक्त के आदेश पर हुआ मामला दर्ज : डीएसपी
गन्नौर डीएसपी सतीश शर्मा ने बताया कि जीटी रोड पर डिवाइन सिटी के सामने बड़ी गांव में फर्जी रजिस्ट्री के मामले में जिला उपायुक्त के आदेश पर नायब तहसीलदार सहित, पटवारी व रजिस्ट्री क्लर्क के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। फिलहाल मामले की पुलिस गहराई से जांच कर रही है।
रजिस्ट्री लिपिक बोली छुट्टी पर थी
रजिस्ट्री लिपिक सुमन का कहना है कि वह उक्त रजिस्ट्री वाले दिन छुट्टी पर थी। इसलिए उसे इस बारे में कुछ नहीं पता। हालांकि पुलिस को दी गई शिकायत में दर्शाया गया है कि गन्नौर तहसील कार्यालय से मिली जानकारी अनुसार सुमन कार्यालय में हाजिर थी तथा इस मामले में सुमन द्वारा दूरभाष पर स्वयं ही उपायुक्त कार्यालय आदि में सूचनाएं दी गई थी।
कुछ दिन पहले जिला उपायुक्त ने छीनी थी नायब तहसीलदार की शक्तियां
उपायुक्त राजीव रतन ने इस मामले में नायब तहसीलदार जयवीर मलिक की रजिस्ट्रेशन की शक्तियां गत 20 नवंबर को छीन ली थी। सरकार द्वारा जारी हिदायतों की अनदेखी करते हुए नायब तहसीलदार जयवीर मलिक ने दिनांक 12-06-2014 को दस्तावेज नंबर 1578/1580 पंजीकृत किया था। इसी पर कार्रवाई करते हुए जिला उपायुक्त ने भारतीय रजिस्ट्रेशन एक्ट की धारा 68 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए नायब तहसीलदार जयवीर मलिक की रजिस्ट्रेशन की शक्तियां छीनी थी।