गोहाना के पंजाब नेशनल बैंक में सुरंग बनाकर 86 लाकरों से करोड़ों के आभूषण उड़ाने के मामले में पुलिस ने भले ही चोरों को काबू कर पहली चुनौती को पार पा लिया हो, लेकिन आभूषणों को बंटवारे को लेकर जो दूसरी चुनौती पुलिस के सामने खड़ी है, उसे पार पाने का तरीका पुलिस को नहीं सूझ रहा है।
हालांकि पुलिस कोर्ट के जरिए पीड़ितों को आभूषण लौटाने का दावा कर रही है, लेकिन पीड़ित इस पर अड़ गए हैं कि उनको गहने बैंक से ही मिलें, उनका कोर्ट कचहरी में क्या काम। इसको लेकर गहनों व सामान की लिस्ट पहले ही बैंक को सौंपी जा चुकी है।
गोहाना के पीएनबी बैंक में हुई चोरी के बाद पुलिस प्रशासन द्वारा जितनी जल्दी मामले पर्दा उठाया गया तथा चोरी का सामान बरामद किया। बेशक पुलिस इसे बड़ी कामयाबी मान कर चल रही है, लेकिन इसके बावजूद पीड़ित लॉकर धारकों को उनकी नुकसान की भरपाई के लिए बरामद सामान वितरण कार्य चुनौती बना हुआ है।
जहां पुलिस प्रशासन कानूनी प्रक्रिया के तहत सामान वितरण की बात कर रही, से पीडित धारकों का कहना है कि प्रशासन बरामद सामान बैंक को हैंडओवर कराए तथा बैंक धारकों को वितरण करें, पर अड़ गए हैं। पीड़ित धारकों का कहना है कि किसी भी कानूनी पचडे़ में नहीं पड़ना चाहते।
बैंक को लॉकर का किराया अदा करते हैं, तो बैंक ही उनके वितरण करें। जिसकी सूची पीड़ित धारकों ने जमा करा रखी है। नतीजतन पीड़ित और प्रशासन आमने-सामने आते दिखाई दे रहे हैं। पीडित राजेश, पुष्पा, शंकुतला देवी, प्रकाश आदि का कहना है कि उनको लेना देना बैंक से है और इस मामले को बैंक ही निपटाए।
पुलिस अधिकारियों को ये नहीं समझ आ रहा है कि आखिर पीड़ितों के पास उनका सोना पहुंचे तो कैसे, कोर्ट में जाने की बात को लेकर भी बार-बार पीड़ित लॉकर धारक चिंता में पड़े हुए है, अगर मामला कोर्ट में गया तो सालों पर गहने मिलने की बात जा सकती है। उधर पुलिस के उच्च अधिकारी इस समस्या में उलझे हुए है कि आखिर सम्मानित करने तो मामले की गुत्थी सुलझाने को लेकर किस अधिकारी को करे।
ये है मामला
27 अक्टूबर की सुबह दस बजे जब पुराने बस स्टेंड पर स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा के मैनेजर ने स्ट्रांग रूम को खोला तो वह हक्के-बक्के रह गए। मैनेजर ने देखा कि करीब तीन से चार फूट चौड़ा एक गड्ढा लॉकर रूम में निकाला हुआ है। शाखा के प्रबंधक ने मामले की सूचना पुलिस को दी।
पुलिस मौके पर पहुंची और देखा कि सुरंग के माध्यम से लॉकरों को उखाड़ कर गहनों को चोरी किया गया है जिसके बाद पुलिस ने आसपास सुरंग की तह को खोजना शुरू किया जिसके बाद सुरंग बैंक के समीप स्थित जर्जर हालत में मकान के अंदर मिली। ये मकान मृतक महिपाल भनवाला का था।
जो इस मामले में मास्टर माइंड बताए जा रहे थे और अब आधा माल उन्हीं के पास होने की बात लॉकर धारकों के द्वारा कही जा रही है। दिन बुधवार तिथि 29 अक्टूबर को पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया और इस मामले की गुत्थी को सुलझा दिया।
अब तक हुई बरामदगी
पुलिस अभी तक 43 किलोग्राम 422 ग्राम सोने व चांदी के गहने और 2.65 लाख रुपये का नकदी बरामद कर चुकी है। पूरा माल लॉकर धारकों के अनुसार पुलिस ने बरामद नहीं किया है लेकिन इसी माल को लेकर पुलिस के उच्च अधिकारी समस्या में उलझे हुए हैं आखिर इस माल को इनके हकदारों तक कैसे पहुंचाया जाए।
कभी गहनों की पहचान करवाने तो कभी इनकी फोटे उतरवाने की बात कही जा रही है। एक तरफ पुलिस के अधिकारी ये भी कह रहे है कि एक दूसरे के गहने मिलते जुलते हो तो उसमें भी समस्या सामने आ सकती है। अगर एक ही गहना होने के बाद चार से पांच लोग ये कहे की ये मेरा है तो भी समस्या उनके सामने आएगी। ऐसे में पुलिस एक तरफ ये भी कह रही है कि अब बरामद किए गए माल को कोर्ट में फैसले के बाद पीड़ित लॉकर धारकों को दिया जाएगा।
कोर्ट के हिसाब से निर्णय
रोहतक रेंज के आईजी अनिल कुमार का कहना हे कि आभूषणों का वितरण कानूनन तरीके से होगा। इसमें जो भी फैसला होगा, वह कोर्ट से होगा। पुलिस प्रयास कर रही है कि सभी पीड़ितों तक उनका सामान पहुंचे।