बच्चे का दिल शरीर से बाहर होने पर उपचार के लिए रोहतक पीजीआई रेफर किया गया था, लेकिन वहां से उसे वापस यह कहकर भेज दिया गया कि उनके यहां बच्चे की सर्जरी की सुविधा नहीं है। जबकि खानपुर कलां मेडिकल कालेज के अंदर भी ऐसी सर्जरी की सुविधा नहीं है। इस कारण ही अन्य अस्पतालों में संपर्क किया जा रहा है, जिससे बच्चे की जल्द सर्जरी कराई जा सके।
शरीर का नहीं हुआ विकास
चिकित्सकों का कहना है कि बच्चे की छाती के अंगों का पूरा विकास नहीं हुआ था, जिसके चलते उसका दिल बाहर धड़क रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि इस तरह का खानपुर कलां के अस्पताल में यह पहला मामला सामने आया है।
उपचार कराने में सक्षम नहीं परिवार
बच्चे के पिता तकदीर व उसकी साली पूजा ने बताया कि दोनों के परिवार मजदूरी करते हैं। अब प्राइवेट अस्पतालों में अगर उसे रेफर किया जाएगा तो लाखों रुपये खर्च आएगा। वह उसका उपचार कराने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में सरकार से मदद मिलने पर ही उपचार करा सकते हैं।
मुझे शिशु विभाग में अपनी सेवाएं देते हुए 20 साल हो चुके हैं, लेकिन मेरे सामने यह दूसरा मामला सामने आया है। जब मैं पहले दूसरी जगह नियुक्त था तो तब एक बार ऐसा मामला सामने आया था। बच्चे का छाती का विकास पूरी तरह से नहीं हुआ है, जिससे उसका दिल शरीर से बाहर धड़क रहा है। 20 लाख बच्चों में एक से दो केस ऐसे मिलते हैं। बच्चे की सर्जरी होगी, लेकिन खानपुर कलां सहित रोहतक में भी सर्जरी की सुविधा नहीं हैं। अन्य अस्पतालों में संपर्क किया जा रहा है और जल्द कोई रास्ता निकाला जाएगा।
- डॉ. मनोज रावल, बाल एवं शिशु विभाग खानपुर कलां अस्पताल।