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आर्मी स्कूल के विद्यार्थी करेंगे एनसीसी की पढ़ाई, पाठ्यक्रम में किया शामिल

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कर्नल अशोक मोर, प्राचार्य एवं निदेशक, मोतीलाल नेहरू खेलकूद विद्यालय, राई। - फोटो : Sonipat
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सैन्य सेवाओं में जाने का सपना संजोने वाले विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। अब आर्मी स्कूलों के पाठ्यक्रम में एनसीसी को शामिल किया जा रहा है। देशभर के सभी 137 आर्मी स्कूलों और सात आर्मी संस्थान में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) को ऐच्छिक विषय के रूप में लागू करने का निर्णय लिया है। आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसायटी इंस्टीट्यूट (एडब्ल्यूईएस) के प्रबंध निदेशक (एमडी) मेजर जनरल आरके रैना की मंजूरी के बाद स्कूल निदेशक कर्नल एसए वर्ती ने इसके लिए अधिसूचना जारी कर दी है।
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मोतीलाल नेहरू खेलकूद स्कूल (एमएनएसएस) राई के प्राचार्य एवं निदेशक कर्नल अशोक मोर पांच वर्ष से इस कोशिश में लगे थे। उन्होंने ही सबसे पहले आर्मी स्कूल में एनसीसी को ऐच्छिक विषय बनवाने के लिए प्रयास शुरू किए थे। सबसे पहले 19 जनवरी, 2017 को एनसीसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विनोद वशिष्ठ को इस बारे में पत्र लिखा और 20 जनवरी, 2017 को उनसे मिले। वर्ष 2018 व 2019 में भी उन्होंने अपने इस प्रयास को जारी रखा। इस मुहिम के लिए मुलाकातें करते रहे। एनसीसी के महानिदेशक तो बदलते रहे, लेकिन कर्नल अशोक मोर ने अपनी कवायद को रुकने नहीं दिया। वर्ष 2020 में उन्होंने फिर यह मुद्दा एनसीसी मुख्यालय में जाकर उठाया। आर्मी के आला अफसर उनकी दलीलों से सहमत थे। इसके बाद ही पूरी प्रक्रिया शुरू हुई। आखिरकार उनका प्रयास रंग लाया और अब एडब्ल्यूईएस (आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसायटी) के प्रबंध संचालक ने देशभर के 137 आर्मी स्कूलों और संस्थानों में एनसीसी को इलेक्टिव (ऐच्छिक) विषय के रूप में लागू करने के आदेश जारी किए हैं। आर्मी संस्थान में नर्सिंग स्कूल, मेडिकल कॉलेज, आर्मी लॉ कॉलेज शामिल हैं।
राई खेलकूद स्कूल के लिए 317 सीटें मंजूर
कर्नल अशोक मोर ने आईआईटी कानपुर में रहते हुए यह मुहिम शुरू की थी। उनकी यह कोशिश अब जाकर सिरे चढ़ी है। यह भी संयोग है कि वे अब आर्मी से सेवानिवृत्त हो चुके हैं और वर्तमान में राई स्थित खेलकूद स्कूल के प्राचार्य एवं निदेशक हैं। स्कूल में नियुक्ति के तुरंत बाद उन्होंने एनसीसी मुख्यालय में जाकर स्कूल के लिए एनसीसी की 317 सीटों की मंजूरी दिलवाई। एमएनएसएस ऐसा अकेला स्कूल है, जिसके पास एनसीसी की इतनी सीटें हैं। कर्नल मोर स्कूल मेें एनडीए (नेशनल डिफेंस एकेडमी) का प्रशिक्षण शुरू करवा चुके हैं, ताकि सैन्य सेवाओं में विद्यार्थियों को बेहतर मौके उपलब्ध हो सकें।
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तीन प्रमाणपत्र के बाद परीक्षा की जरूरत नहीं
एनसीसी में तीन लेवल के प्रमाणपत्र होते हैं। लिखित परीक्षा के बाद ए, बी और सी प्रमाणपत्र मिलते हैं। एनसीसी में रहते हुए जिस विद्यार्थी ने ये तीनों प्रमाणपत्र हासिल कर लिए, उसे एनडीए की लिखित परीक्षा से छूट मिल जाती है। वह सीधे एसएसबी (सर्विस सिलेक्शन बोर्ड) के लिए मान्य हो जाता है। यही नहीं, जिस विद्यार्थी के पास ये तीनों प्रमाणपत्र हैं, वह आर्मी में सीधे ही सैनिक पद पर भर्ती हो सकता है। स्कूल प्रबंधन ने विद्यार्थियों को सैन्य सेवाओं के प्रति जागरूक करने और उन्हें थल सेना, जल सेना और वायु सेना में बेहतर मौके मुहैया करवाने के लिए यह पूरी कवायद की है। हरियाणा, नई दिल्ली व चंडीगढ़ पुलिस में भर्ती के दौरान भी एनसीसी प्रमाणपत्र हासिल करने वाले विद्यार्थियों को पांच अंकों का अतिरिक्त लाभ मिलता है। इसी तरह से भारतीय सुरक्षा बल, सीआरपीएफ सहित अर्धसैनिक बलों की भर्तियों में भी एनसीसी कैडेट्स को तवज्जो मिलती है।
वर्ष 1948 में हुई थी शुरुआत
एनसीसी का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। देश में एनसीसी की शुरुआत 16 जुलाई, 1948 को हुई थी। स्कूल एवं महाविद्यालयों में एनसीसी स्वैच्छिक आधार पर चल रही थी। अब आर्मी स्कूलों में इसे विषय के तौर पर लागू करने से इसका महत्व और बढ़ेगा। एनसीसी तीनों सेनाओं- थल सेना, नौ सेना और वायु सेना का त्रिकोणीय सेवा संगठन है। एनसीसी कैडेट्स को प्रशिक्षण के दौरान छोटे हथियारों व परेड में बुनियादी सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता है। चयन के दौरान सामान्य उम्मीदवारों को उपलब्धियों के आधार पर वरीयता दी जाती है।
पांच साल अनिवार्य रहा एनसीसी प्रशिक्षण
वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद एनसीसी प्रशिक्षण को वर्ष 1963 में अनिवार्य कर दिया था। वर्ष 1968 में इस अनिवार्यता को खत्म करके फिर से स्वैच्छिक बनाया गया। एक और रोचक पहलू यह है कि वर्ष 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान एनसीसी कैडेट्स को भारतीय सेना के बाद सुरक्षा की दूसरी पंक्ति में खड़ा किया था। वे सेना को हथियार, गोला-बारूद व अन्य सामग्री की आपूर्ति करते थे।
वर्जन
हमारे लिए गर्व की बात है कि आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसायटी इंस्टीट्यूट ने आर्मी स्कूलों में एनसीसी को ऐच्छिक विषय के रूप में लागू करने का निर्णय लिया है। वर्ष 2022-23 के सत्र से इसकी शुरुआत हो जाएगी। मैं आर्मी में रहा हूं और इसके महत्व को समझता हूं। वर्ष 2017 से ही मैं इस कोशिश में लगा था। हमारी मेहनत रंग लाई है। राई खेलकूद स्कूल में एनसीसी की 317 सीटें हैं और यहां एनडीए के लिए प्रशिक्षण भी शुरू करवा दिया गया है।
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- कर्नल अशोक मोर, प्राचार्य एवं निदेशक, राई खेलकूद स्कूल, सोनीपत
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