संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। खेतों में जलभराव से बड़वासनी, गढ़ी हकीकत, जटमाजरा, रतनगढ़, भटगांव, बागडू गांव में 500 एकड़ में फसल बर्बाद होने की आशंका को लेकर किसानों ने वीरवार को बड़वासनी गांव में प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। इसके बाद लघु सचिवालय पहुंचे किसानों से एसडीएम सुभाष चंद्र को ज्ञापन सौंपकर खेतों से जलनिकासी कराने की मांग की।
किसानों ने ड्रेन की सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल उठाएं। साथ ही फसल की गिरदावरी कराकर 60 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा देने की मांग की। किसान ताहर सिंह, कर्मबीर, राजबीर, रणबीर, संदीप, कुलदीप, योगेश व जगविंद्र ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों से ड्रेन की सफाई कराने की मांग कई बार की लेकिन ठोस कदम नहीं उठाया।
किसानों ने कहा कि प्रशासन की अनदेखी के कारण आज सैकड़ों एकड़ फसल खराब हो गई है। उन्होंने कहा जिस फसल के भरोसे उन्होंने घर-परिवार चलाने और बच्चों के सपने पूरे करने की उम्मीद की थी। वह फसल बारिश के बाद पानी में डूबकर सड़ने लगी है और किसान कर्ज व चिंता के बोझ तले दबते जा रहे हैं।
जिला पार्षद संजय बड़वासनी ने कहा कि गांवों के पास से ईस्ट जुआं ड्रेन गुजर रही है। इसकी सफाई न होने की वजह से वर्षा के पानी की निकासी नहीं हो पाती है जिससे फसल खराब हो गई है। कई किसानों ने 50 हजार रुपये एकड़ के हिसाब से खेती के लिए पट्टे पर जमीन ले रखी है।
फसल खराब होने की वजह से उनको आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनकी मांग है कि बारिश के पानी को खेतों से निकालने का प्रबंध किया जाए और किसानों को प्रति एकड़ के हिसाब से 60 हजार रुपये मुआवजा दिया जाए।
किसान सुरेश, मोनू डागर का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी न तो प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और न ही कोई समाधान किया गया। वह बार-बार प्रशासन को समस्या बता चुके हैं, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। फसल बर्बादी के बाद वे मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं। हर बार बारिश में यही हालात बनते हैं लेकिन प्रशासन समस्या का स्थायी समाधान करने के बजाय आश्वासन देकर पल्ला झाड़ लेता है।
सरकार की नीतियों पर उठे सवाल
किसान वेदपाल व रामफल ने सरकार पर भी अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि किसान हितैषी योजनाओं की बातें केवल कागजों तक सीमित हैं। सरकार किसान का हितैषी होने का दावा करती है, लेकिन हमारे गांवों में अधिकारी तक हालात देखने नहीं पहुंचे। प्रशासन की लापरवाही ने हालात और भी खराब कर दिए हैं। किसानों ने खेतों से पानी निकासी के लिए स्थायी व्यवस्था करने, बर्बाद हुई फसलों का त्वरित निरीक्षण कर उचित मुआवजा देने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।