सोनीपत। 35 दिन से लगातार हड़ताल कर रहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं ने बुधवार को लघु सचिवालय परिसर में जेल भरो आंदोलन कर अपनी गिरफ्तारी दी। इससे पहले उन्होंने मांगों का लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। पुलिस 907 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन में ले गई। जहां पर तहसीलदार मनोज ने उनकी जमानत ली।
बुधवार को जेल भरो आंदोलन को लेकर सुबह से ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएं लघु सचिवालय में एकत्रित होना शुरू हो गई थीं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं के जेल भरो आंदोलन का नेतृत्व कर्मचारी नेताओं ने किया। जेल भरो आंदोलन में शामिल होने के लिए जिलेभर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएं पहुंचीं। भीड़ के चलते लघु सचिवालय के बाहर भी जाम की स्थिति बनी रही। किसी भी घटना से निपटने के लिए पुलिस बल पहले से तैनात रहा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। दोपहर बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं ने गिरफ्तारी दी, इसके बाद इन्हें पुलिस की गाड़ियों में बैठाकर पुलिस लाइन में ले जाया गया। कर्मचारी नेताओं ने सरकार पर वादाखिलाफी के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री ने यूनियनों के साथ समझौता किया था, इसके बावजूद आज तक उस समझौते को लागू नहीं किया गया। जिस कारण 8 दिसंबर 2021 से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं की हड़ताल जारी है, लेकिन सरकार उनकी मांगों का समाधान करने की बजाय नोटिस देकर उन पर दबाव बनाने में लगी है। जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पुलिस लाइन में नहीं करवाई गई पानी की व्यवस्था
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं के प्रस्तावित जेल भरो आंदोलन के दौरान पीने के पानी की व्यवस्था तक नहीं थी। सीटू के जिला प्रधान आनंद शर्मा ने बताया कि 5 जनवरी को ही प्रशासन को अवगत करवाया गया था कि जिले में 12 जनवरी को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएं गिरफ्तारियां देंगी। इसी वजह से धरनास्थल पर पीने के पानी, बसों तथा बैठने की व्यवस्था की जाए, लेकिन इनमें से कोई भी व्यवस्था नहीं गई थी। पीने का पानी भी 3 घंटे बाद पहुंचा। वहीं सभी प्रदर्शनकारियों को जमीन पर ही बैठना पड़ा। इसके अलावा पुलिस विभाग की बसों की संख्या भी कम थी। जिससे अस्थायी जेल से प्रदर्शन स्थल तक कई चक्कर लगाने पड़े।
यह हैं मांगें
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को वर्कर मानते हुए न्यूनतम वेतन दिया जाए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में पूरे देश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के लिए 1500 रुपये, सहायिका के लिए 750 रुपये बढ़ोतरी की थी, जिसे हरियाणा में लागू किया जाए।