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अफसरों और ठेकेदारों में मिलीभगत के आरोप, 184.73 करोड़ का बजट पास

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नगर निगम का बजट पास करने के लिए सोमवार को वर्चुअल बैठक करनी पड़ी, जबकि इससे पहले मेयर व पार्षदों ने वर्चुअल बैठक का बहिष्कार कर दिया था और इस कारण ही निगम का बजट पास नहीं हो रहा था। अब बजट को लेकर देरी होने पर वर्चुअल बैठक की गई, लेकिन बैठक में मेयर व पार्षदों ने निगम के अफसरों पर खूब आरोप लगाए। अफसरों पर विकास कार्य नहीं कराने के साथ ही ठेकेदारों से गठजोड़ करके जनता का पैसा उन पर लुटाने के आरोप लगाए गए तो शहर की सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए। इस बीच ही निगम का वर्ष 2021-22 का 184.73 करोड़ रुपये का बजट पास कर दिया गया।
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नगर निगम बोर्ड की वर्चुअल बैठक में मेयर निखिल मदान के साथ ही 19 पार्षद मौजूद रहे, जबकि एक पार्षद मनजीत गहलावत ने वर्चुअल बैठक का बहिष्कार कर दिया और वह मीटिंग से नहीं जुड़े। बैठक में मेयर निखिल मदान ने कहा कि निगम के अधिकारी व ठेकेदारों में गठजोड़ चल रहा है और जनता का रुपया ठेकेदारों पर लुटाया जा रहा है। शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ी हुई है और पिछली बैठक में यह मुद्दा उठाया गया था, लेकिन उसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि नालों की सफाई भी अभी तक नहीं कराई गई है, जिससे बारिश होने पर शहर में बुरा हाल हो जाएगा। इसलिए सफाई कंपनी का ठेका निरस्त करने के साथ ही उसे ब्लैक लिस्ट करने के लिए कहा गया। जिस पर कमिश्नर जगदीश शर्मा ने बताया कि सफाई को लेकर निरीक्षक को सस्पेंड कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि शहर में सीवर के लिए जिस जेई को जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वे काम ही नहीं संभाल रहे हैं। इससे शहर में सीवर समस्या बनी हुई है। मेयर निखिल मदान ने आरोप लगाया कि गढ़ शहजानपुर व बहालगढ़ में अवैध निर्माण चल रहा है, लेकिन निगम के अफसर कार्रवाई नहीं करते हैं। अफसरों की मिलीभगत के कारण ऐसा हो रहा है। मेयर ने निगम में पिछले लंबे समय से जमे अफसरों को नकारा बताते हुए कहा कि इनका तबादला होना चाहिए। उनके तबादला व कार्रवाई के लिए मेयर समेत पार्षदों ने पत्र भी लिखा है, जिससे निगम में हालात सुधर सके। इसके साथ ही मेयर ने लॉकडाउन की अवधि के दौरान का दुकानों का किराया माफ करने की मांग भी उठाई और सरकार से मंजूरी के लिए पत्र भेजने की बात कही है।
निगम की 190.30 करोड़ की हुई आय
नगर निगम में वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 190.30 करोड़ की आय और 184.73 करोड़ के व्यय का बजट पास किया गया। इसमें से 82 करोड़ रुपये शहर और गांव के विभिन्न विकास कार्यों और मरम्मत कार्यों जैसे सीवरेज व्यवस्था, पार्कों के सुंदरीकरण, पेयजल के लिए बूस्टिंग स्टेशन, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, सार्वजनिक शौचालयों पर खर्च किए जाएंगे। बजट में सभी पार्षदों के वार्ड में 1-1 करोड़ और मेयर के लिए 5 करोड़ के ऐच्छिक विकास कार्यों के प्रस्ताव को पास किया गया। इसके साथ ही अन्य आपातकालीन स्थिति में 5 करोड़ के अतिरिक्त बजट का भी प्रावधान रखा गया। इसके अलावा वेतन, पेंशन समेत अन्य के लिए बजट रखा गया है। वहीं निगम की सबसे ज्यादा आय स्टांप ड्यूटी से करना बजट में रखा गया है।
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वर्जन
भाजपा व कांग्रेस सभी पार्षदों ने समस्याओं का समाधान न होने के लगाए आरोप
नगर निगम के अधिकारियों से किसी एक पार्टी के पार्षद ही परेशान नहीं हैं, बल्कि भाजपा व कांग्रेस दोनों पार्टियों के पार्षद निगम के अधिकारियों के कार्य नहीं कराने से परेशान हैं। भाजपा पार्षद लक्ष्मीनारायण तनेजा ने कहा कि उनके यहां ढाई माह से सीवर समस्या है। वह कई बार अधिकारियों के पास चक्कर काट चुके हैं और अब अधिकारी उनका फोन तक नहीं उठाते हैं। कोरोना के कारण वह शांत हैं और वह कोरोना कम होने पर निगम कार्यालय का घेराव करेंगे। निर्दलीय पार्षद मुकेश सैनी ने कहा कि सफाई के लिए कहते हैं तो कहते हैं मशीन खराब है, अगर मशीन ठीक नहीं चलती तो उनको बेचकर आने वाले रुपये पार्षदों को देकर सफाई कराई जा सकती है। भाजपा पार्षद पुनीत राई ने कहा कि उनके यहां गंदगी पसरी है और दूषित पानी की निकासी नहीं होती है। मेयर के निरीक्षण के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती है। लिवान में पेयजल समस्या है। भाजपा पार्षद सुरेंद्र मदान ने कहा कि आदर्श नगर में सीवर लाइन बिछाने का 84 लाख रुपये का टेंडर छोड़ा गया था, लेकिन अभी तक सीवर लाइन बिछाने का काम शुरू भी नहीं हुआ है। पार्षद बिजेंद्र मलिक ने कहा कि शहर में सफाई नहीं हो रही तो स्ट्रीट लाइट भी ठीक नहीं कराई जा रही है।
पार्षदों के पति भी बैठक में शामिल हुए तो आपत्ति जताई
नगर निगम की बोर्ड बैठक में पिछली बार किसी भी महिला पार्षद के पति को अंदर नहीं बैठने दिया गया था और उस समय ही साफ कर दिया गया था कि बैठक में केवल पार्षद ही मौजूद रहेंगी। इस बार वर्चुअल बैठक में महिला पार्षदों के पति प्रवीण सैनी, संजीव वलेचा, प्रद्युम्न कौशिक भी शामिल हो गए। इस पर कई लोगों ने आपत्ति जताई, लेकिन वह बैठक से जुड़े रहे। इस तरह पत्नी की जगह पति का राजनीति का चस्का नहीं छूट रहा है।
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