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अधिवक्ता दिवस : आपातकाल में जेल गए, एचसीएस का साक्षात्कार छोड़ बने अधिवक्ता

Sun, 01 Dec 2024 02:44 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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सोनीपत। अपने अधिकारों के लिए तो हर व्यक्ति संघर्ष करता है, लेकिन ऐसे विरले ही होंगे जो अपने हितों का परित्याग कर जनहित व दूसरों की भलाई के लिए संघर्षरत रहते हैं। इन्हीं में से एक है सोनीपत बार एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र सिंह दहिया। राजेंद्र सिंह दहिया ने वर्ष 1975 में आपातकाल के दौरान जेल की चहारदीवारी में जाना मुनासिब समझा, लेकिन सरकार की गलत नीतियों के आगे घुटने नहीं टेके। इसके लिए उन्होंने अपने सपने का त्याग कर एचसीएस का साक्षात्कार तक नहीं दिया, बाद में वह अधिवक्ता बने।
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सोनीपत बार एसोसिएशन के दो बार प्रधान रहे राजेंद्र सिंह दहिया ऑल हरियाणा बार एसोसिएशन के प्रधान भी रहे। उन्होंने प्रधान रहते वकीलों के हित में कार्य किए। सोनीपत के गांव सिसाना निवासी राजेंद्र सिंह दहिया वर्तमान में सेक्टर-23 में रहते हैं। वर्ष 1950 में जन्मे राजेंद्र सिंह दहिया बताते हैं कि आपातकाल के दौरान वह जेल में रहे। दो विषयों में स्नातकोत्तर व एलएलबी ऑनर्स करने के साथ एचसीएस की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी। तब उनका साक्षात्कार होना था। परिजन जब जेल में पत्र लेकर गए तो कहा गया कि माफी नाम देकर वह साक्षात्कार दे सकते हैं, लेकिन उन्होंने मना कर दिया था। वह एचसीएस के साक्षात्कार को नहीं गए। जेल से बाहर आने के बाद वकालत शुरू कर दी थी। वह 1990-91 में 40 साल की आयु में बार के प्रधान बने और फिर 2018 में दूसरी बार यह जिम्मेदारी संभाली। वह 1990 में ही ऑल हरियाणा बार एसोसिएशन के प्रधान बने थे। कई साल यह जिम्मेदारी निभाई। वकीलों के हित में लगातार काम किए।

चंडीगढ़ आंदोलन में लिया बढ़चढ़ कर भाग
वर्ष 1970 में शिक्षा ग्रहण करने के दौरान चंडीगढ़ को पंजाब का हिस्सा बताए जाने के बाद आंदोलन हुआ था। इसमें भी राजेंद्र सिंह दहिया ने महती भूमिका निभाई थी।
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पिपली कांड में लिया था बढ़चढ़ कर भाग, गए थे जेल

वर्ष 1975 में शुरू हुए आपातकाल में चले नसबंदी अभियान के विरोध में हुए पिपली कांड में भी वह बढ़चढ़ कर आगे रहे थे। पदोन्नति के चक्कर में अधिकारियों की तरफ से नसबंदी के लिए जबरदस्ती के बाद 2 दिसंबर, 1975 को लोगों और पुलिस में हिंसक झड़प हुई थी। इस झड़प में एक महिला और एक पुरुष समेत एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई थी। तब उस समय उन्होंने लोगों की लड़ाई लड़ी और जेल भी गए। वह लगातार सामाजिक कार्यों में जुड़े रहते हैं।
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