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Sonipat News: 16 एमएलडी सीईटीपी पर लगाया 2.52 करोड़ का जुर्माना

Tue, 26 Aug 2025 02:17 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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सोनीपत। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) ने राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के आदेश के बाद बड़ी औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण पर कड़ा प्रहार किया है। बोर्ड ने 16 एमएलडी कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) पर मानक पूरे न करने पर 2.52 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया है।
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वहीं, 16 और 10 एमएलडी सीईटीपी पर अतिरिक्त 1.20 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रस्ताव सक्षम प्राधिकारी को भेजा गया है। इसके अलावा 16 एमएलडी सीईटीपी के खिलाफ डिस्चार्ज मानक तोड़ने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सोनीपत की अदालत में अभियोजन भी दायर किया गया है।

एनजीटी के 8 जनवरी के आदेश के अनुपालन में यह रिपोर्ट पेश की गई। आदेश के तहत राज्य सरकार को एचएसआईआईडीसी से परामर्श लेकर समयबद्ध कार्य योजना दाखिल करने और जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम के तहत उल्लंघनकर्ताओं पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे।
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निरीक्षण में मिलीं खामियां

बड़ी औद्योगिक क्षेत्र 1255 एकड़ में तीन चरण में फैला हुआ है। यहां कुल 253 औद्योगिक इकाइयां सक्रिय हैं। इनमें से 136 इकाइयां अपशिष्ट जल उत्पन्न करती हैं। 74 टेक्सटाइल यूनिट (डाइंग, वॉशिंग, प्रिंटिंग आदि) प्रमुख हैं। निरीक्षण में पाया गया कि 136 अपशिष्ट जल इकाइयों में से 113 में प्राइमरी एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (पीईटीपी) सही से संचालित नहीं हो रहे थे। कई इकाइयों में जान-बूझकर डाइल्यूशन (पानी मिलाना) पाया गया। कई इकाइयों से बिना शोधित पानी स्टॉर्म वाटर सिस्टम में छोड़ा जा रहा था। कई इकाइयों के पास भूजल दोहन की वैध अनुमति नहीं थी। फ्लो मीटर की कमी और पीईटीपी स्लज का अनुचित निस्तारण जैसी कमियां दर्ज की गईं। जॉइंट कमेटी ने एचएसआईआईडीसी की तरफ से स्टॉर्म वॉटर को सीईटीपी और ड्रेन-6 की ओर मोड़ने वाली दोहरी पाइप लाइन व्यवस्था पर भी आपत्ति जताई। इससे औद्योगिक अपशिष्ट और बारिश के पानी के मिश्रण का खतरा बढ़ रहा है।



सीईटीपी संचालन पर सवाल

16 और 10 एमएलडी सीईटीपी को अंडर यूटिलाइज्ड और नॉन-कम्प्लायंट पाया गया। 16 एमएलडी सीईटीपी बिना कंसेंट टू ऑपरेट के चल रहा था। जॉइंट कमेटी की तरफ से लिए गए नमूनों में 10 एमएलडी सीईटीपी के सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। हालांकि मार्च से 10 एमएलडी और जुलाई से 16 एमएलडी सीईटीपी धीरे-धीरे मानकों पर खरा उतरने लगे हैं। एचएसपीसीबी ने अब तक 6 इकाइयों को बंद कर सील किया है जबकि दो और इकाइयों पर कार्रवाई प्रक्रिया में है। 35 इकाइयों ने पुन: सैंपलिंग के लिए व्यवहार्यता रिपोर्ट व सुरक्षा जमा कराई है। डाइल्यूशन में पकड़ी गई इकाइयों ने तकनीकी संस्थानों से मूल्यांकन करवाने की पहल की है। भूजल दोहन के मामले में 24 इकाइयों के पास वैध अनुमति है, 46 ने नवीनीकरण के लिए आवेदन किया है और 13 के पास बोरवेल ही नहीं है। पिछली उल्लंघन अवधि में 23 इकाइयों पर जिला प्रशासन ने पर्यावरणीय मुआवजा लगाया।



मानकों पर खरा नहीं उतरने की वजह से 16 एमएलडी सीईटीपी पर 2.52 करोड़ रुपये का मुआवजा लगाया गया है। साथ ही 16 और 10 एमएलडी सीईटीपी पर भी जुर्माने का प्रस्ताव दिया गया है। कार्रवाई की रिपोर्ट एनजीटी के आदेशानुसार जमा कर दी गई है। जुर्माना संबंधित औद्योगिक इकाइयां वहन करेंगी या एचएसआईआईडीसी यह तय करना एचएसआईआईडीसी का काम है। -निर्मल कश्यप, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
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