सिद्धपीठ सतकुंभा तीर्थ में आयोजित रुद्र महायज्ञ में आहुति डालते श्रद्धालु। संवाद
गन्नौर। सिद्धपीठ सतकुंभा तीर्थ में रुद्र महायज्ञ के दौरान अध्यात्म, विज्ञान और लोक कल्याण का अनूठा संगम देखने को मिला। विशाल यज्ञशाला में वेद मंत्रों की गूंज और आहुति से वातावरण भक्तिमय हो गया।
पीठाधीश्वर राजेश स्वरूप महाराज ने कहा कि यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि मानव और प्रकृति के संतुलन का वैज्ञानिक माध्यम है। उन्होंने बताया कि रुद्र महायज्ञ का उद्देश्य रोगों व विकारों से मुक्ति और पर्यावरण शुद्धि है।
यज्ञ से उत्पन्न औषधीय धूम्र हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने में सहायक होता है। इससे मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कार्यक्रम में हरियाणा कला परिषद, रोहतक के कलाकारों ने शिव स्तुति व भजन प्रस्तुत कर समां बांधा।
विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों व ग्रामीणों ने सामूहिक आहुति दी। हजारों श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था की गई। पीठाधीश्वर ने कहा कि सामूहिक यज्ञ से समाज में सकारात्मक ऊर्जा और विश्व कल्याण की भावना सुदृढ़ होती है।