जिला कारागार में लगे शिविर में निरीक्षण करते पहुंचे सिविल सर्जन डॉ. जयकिशोर।
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बंदियों का उपचार शुरू होने में लगेगा समय
कंपनी से अनुबंध समाप्त होने के चलते अब जिला कारागार में मिले हेपेटाइटिस सी के 39 मरीजों का उपचार शुरू होने में समय लगेगा। अब लैब से अनुबंध होने के बाद ही उनका उपचार शुरू हो सकेगा।
ऐसे होती है हेपेटाइटिस की पहचान
चिकित्सक तरुण यादव का कहना है कि काफी समय पर पीलिया रहना, बार-बार उल्टी लगना व भूख न लगना हेपेटाइटिस के लक्षण हैं। ऐसे में लोगों को अपना इलाज तुरंत शुरू कराना चाहिए। प्राथमिक जांच में ही चिकित्सक मरीज को हेपेटाइटिस होने की पुष्टि कर देते हैं। इसके बाद मरीजों को कूपन जारी किया जाता है। उस कूपन के माध्यम से लैब पर मरीज को मुफ्त में काला पीलिया की स्थिति व जिनोटाइप टेस्ट कराया जाता था। जांच रिपोर्ट में पुष्टि के बाद मरीज का उपचार शुरू किया जाता है। मरीज का तीन माह तक उपचार चलता है, अगर लीवर खराब है तो मरीज को छह माह तक दवा खानी पड़ती है। करनाल से दवाई आने के बाद हेपेटाइटिस सी के पुराने मरीजों को वितरित कर दी जाएगी।
हेपेटाइटिस को लेकर जागरूकता जरूरी
हेपेटाइटिस सी और बी को लेकर लोगों में जागरूकता जरूरी है। जिस मरीज को काला पीलिया है, उसे ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। साथ ही जो लोग नशा करते हैं वह अपने साथियों के साथ एक ही सीरींज का प्रयोग करते हैं। इसलिए नशे से दूर रहना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग के पास जिले में अब तक 1470 हेपेटाइटिस के मरीज रजिस्टर्ड हैं। जिसमें से 1196 हेपेटाइटिस सी व 274 हेपेटाइटिस बी के मरीज हैं।
हेपेटाइटिस सी के टेस्ट और उपचार के लिए मुख्यालय की ओर से कूपन उपलब्ध कराया जाता है।। इसके तहत मरीजों के निशुल्क टेस्ट और दवाइयां मिलती हैं। विभाग का जिस कंपनी के साथ टेंडर था, वह खत्म हो गया है। इसके चलते फिलहाल टेस्ट बंद हो गए हैं। मरीजों को इंतजार करने के लिए कहा गया है। मुख्यालय स्तर पर टेंडर होते ही टेस्ट शुरू करा दिए जाएंगे। -डॉ. तरुण यादव, उप सिविल सर्जन