नियम 134-ए शिक्षा विभाग के गले की फांस बन गया है, जो न निगला जा रहा है और न उगला ही जा रहा है। सरकार के निर्देशों पर दो माह पहले भी लर्निंग लेवल टेस्ट लेकर बच्चों का ड्रॉ निकाला था। अब फिर तीन जुलाई को बच्चों का टेस्ट लेना है। हालांकि, पिछले ड्रॉ के लगभग 18 सौ बच्चों में से 90 प्रतिशत का दाखिला ही नहीं मिल पाया है। वहीं, निजी स्कूलों को दो दिन के अंदर अपने यहां रिक्त सीटों का ब्यौरा देने के लिए कहा गया था, लेकिन डेडलाइन निकल चुकी है। इसमें भी महज 20 प्रतिशत स्कूलों ने ब्यौरा दिया है। विभागीय अधिकारी इस बारे में निवेदन भी कर चुके है, लेकिन कोई हल नहीं निकला। बता दें कि अब 3 जुलाई को लर्निंग लेवल टेस्ट की तारीख तय की गई है। इस दिन साढ़े 4 हजार बच्चों के परीक्षा देने की संभावना है। इसके बाद आठ से 15 जुलाई के बीच दाखिलों का समय रखा गया है। वहीं, सीटें बचने पर 18 जुलाई को दूसरा ड्रॉ घोषित किया जाएगा। इसके बाद 22 जुलाई तक दाखिले होंगे।
फेल हुए या रहे गैरहाजिर, अब दें टेस्ट
तीन जुलाई को होने वाले लर्निंग लेवल टेस्ट में वे बच्चे टेस्ट दे सकते हैं जो किन्हीं कारणों से टेस्ट में अनुपस्थित रहे। इसके अलावा जो बच्चे टेस्ट उत्तीर्ण नहीं कर पाए थे, वे दोबारा टेस्ट दे सकते हैं। इस टेस्ट के लिए रोल नंबर वही रहेगा, जो 5 मई के टेस्ट के दौरान था। जिनके पास रोल नंबर नहीं है वे संबंधित बीईओ कार्यालय से रोल नंबर पा सकते हैं।
4765 देंगे परीक्षा, तैयारी में विभाग
पांच मई को हुई परीक्षा के लिए 6518 ने आवेदन किया था। इसमें से 5263 विद्यार्थी परीक्षा में बैठे। 1255 विद्यार्थियों परीक्षा में अनुपस्थित रहे। कुल 1753 विद्यार्थी 55 प्रतिशत अंक लेकर परीक्षा में क्वालीफाई कर पाए। इनमें सबसे अधिक सोनीपत ब्लॉक से 1185, गोहाना ब्लॉक से 240 विद्यार्थी, गन्नौर ब्लॉक से 95 विद्यार्थी, राई ब्लॉक से 70 विद्यार्थी, खरखौदा ब्लॉक से 64 विद्यार्थी, मुंडलाना ब्लॉक से 62 विद्यार्थी और कथूरा ब्लॉक से 37 विद्यार्थी परीक्षा में क्वालीफाई हुए। अब तीन जुलाई को बचे हुए 4765 बच्चे परीक्षा देंगे। परीक्षा के लिए विभागीय तैयारी चल रही है।
इक्का-दुक्का स्कूलों ने दिए दाखिले
छात्र अभिभावक संघ के विमल किशोर तथा हरियाणा अभिभावक मंच के राजीव वर्मा बताते हैं कि 1753 बच्चों में से 90 प्रतिशत बच्चे अभी तक घर पर ही बैठे हैं। सिर्फ इक्का-दुक्का स्कूलों ने ही बच्चों के दाखिले लिए हैं। निजी स्कूल संचालक मनमर्जी से काम कर रहे हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। माननीय अदालत तथा सरकार के निर्देशों का निजी स्कूलों पर कोई असर नहीं हो रहा।
क्या कहते हैं अभिभावक
- मेरे बेटे मोहित का कक्षा 6 में पढ़ता है। ड्रॉ में नाम नहीं आया था, इसलिए मायूसी थी। अब दोबारा से मौका मिला है तो अच्छी तरह से टेस्ट दिलवाया जाएगा। हालांकि, इस बार समय कम मिला है तैयारी के लिए।
राजेश, अभिभावक
आठवीं कक्षा में बेटा पढ़ता है, ड्रॉ में नाम नहीं आया था। अब दोबारा मौका मिला है तो सिर्फ तीन दिन का समय दिया गया है। तीन दिन में टेस्ट के लिए क्या तैयारी की जा सकती है। सरकार को कुछ तो सोचना चाहिए।
मनोज, अभिभावक
नाम आने के बाद भी नहीं हुए दाखिले
दूसरी कक्षा में बेटा पढ़ता है, सत्यम मॉडर्न स्कूल में नाम आया था, लेकिन अभी तक दाखिला ही नहीं मिला। कई बार अधिकारियों के दफ्तरों में चक्कर लगा लिए, लेकिन कोई हल नहीं हुआ। नए टेस्ट लेने का क्या फायदा, पहले पुराने वालों का दाखिला तो करवा दो।
गीता रानी, अभिभावक
मेरी बेटी भूमि दूसरी कक्षा में है और डीएवी स्कूल में नाम आया था। आज तक दाखिला नहीं हो पाया है। अगर सरकार दाखिला नहीं करवा सकती तो टेस्ट लेकर बच्चे और लोगों की भावना से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। खाली टेस्ट लेने से क्या दाखिला तो हुआ नहीं।
प्रोमिला, अभिभावक
स्कूलों से निवेदन किया गया था, लेकिन ज्यादा स्कूलों ने रिकार्ड उपलब्ध नहीं करवाया गया है। तीन जुलाई को वे बच्चे टेस्ट देंगे, जो पिछली बार फेल हो गए थे या अनुपस्थित रहे थे। इनकी संख्या 4765 है। दाखिलों के लिए प्रयास जारी है। अगर स्कूल संचालक आनाकानी करेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जिले सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी, सोनीपत।