सोनीपत।
अपनी जिंदगी में किसने क्या बनने का सपना संजोया है, वह बचपन में पता चल जाता है। ऐसे ही मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने वाली मानुषी छिल्लर के बारे में उसके माता-पिता को लगने लगा था कि वह मॉडलिंग करना चाहती है। क्योंकि मानुषी घर के बेडरूम में आईने के सामने खड़ी होकर अपनी मम्मी की साड़ी बांधती थीं और उसके बाद कैटवॉक करती थीं। मानुषी कई बार साड़ी बदलती थी तो वह कमरे में साड़ियों का ढेर लगा देती थीं। बचपन में बेटी की यह हरकत देखकर भी मानुषी को उसकी मम्मी डॉ. नीलम ने कभी कुछ नहीं कहा। इस तरह मानुषी ने बचपन में मम्मी की साड़ी बांधकर कैटवॉक करके आज विश्व सुंदरी बनने तक का सफर तय कर लिया है।
मिस वर्ल्ड बनीं मानुषी छिल्लर की मां डॉ. नीलम छिल्लर और डॉ. मित्रवसु छिल्लर दोनों ने कभी बेटी पर जबरन कुछ नहीं थौपा। दोनों पति-पत्नी पेशे से डॉक्टर हैं तो वह बेटी को एमबीबीएस की पढ़ाई कराकर डॉक्टर बनाना चाहते थे, लेकिन इसके लिए मानुषी पर कभी दबाव नहीं बनाया। मानुषी ने भी अपने माता-पिता की उम्मीदों को कभी नहीं टूटने दिया और 12वीं में टॉप करने के बाद पहले ही प्रयास में एआईपीएमटी की परीक्षा पास कर ली। मानुषी ने भगत फूल सिंह महिला मेडिकल कॉलेज खानपुर कलां- सोनीपत में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू कर दी।
मानुषी से माता-पिता कहते थे कि एमबीबीएस के साथ वह अपनी इच्छा के अनुसार मॉडलिंग कर सकती है। वहीं मानुषी ने अपने माता-पिता से वादा किया था कि वह एमबीबीएस की पढ़ाई में मॉडलिंग को कभी बाधा नहीं बनने देगी। मानुषी के इस वादे के कारण ही हर जगह उसे माता-पिता का साथ मिलता रहा और वह आगे बढ़ती चली गईं। मानुषी की मां डॉ. नीलम बताती हैं कि मॉडलिंग के फील्ड के बारे में उनको जानकारी नहीं थी। लेकिन मानुषी बचपन से मॉडलिंग का शौक रखती थी, क्योंकि वह शीशे के सामने खड़ी होकर उनकी साड़ी बांधकर कैटवॉक करती थी। बेटी को उन्होंने कभी न टोका और उसे न कभी डांटा, बल्कि हमेशा कुछ अच्छा करने के लिए उसके साथ खड़े रहे। यही कारण है कि आज उनकी बेटी मिस वर्ल्ड बन गई और दुनिया में उनकी बेटी ने देश का नाम रोशन किया है।
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बेटियों को आगे बढ़ाने को प्रोत्साहित करना चाहती है मानुषी
मानुषी छिल्लर ने फेमिना मिस इंडिया बनने के बाद बीपीएस महिला मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर प्रदेश की स्थिति को देखते हुए बेटियों के लिए कुछ करने की इच्छा जताई थी। मानुषी ने कहा था कि वह सरकार के साथ मिलकर बेटियों को प्रोत्साहित करने के लिए कुछ करना चाहती हैं। क्योंकि प्रदेश में घूंघट प्रथा के साथ ही आज भी बेटियों के जन्म होने पर खुशी नहीं मनाई जाती हैं, जबकि बेटियों को कभी बेटों से कमजोर नहीं समझना चाहिए। मानुषी ने सीएम मनोहर लाल खट्टर से मिलकर भी अपने मन की बात बताई थी, जिससे बेटियों को परिवार वाले आगे बढ़ाने में मदद कर सकें।
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कैंपस प्रिंसिज से मिस वर्ल्ड तक पहुंचीं मानुषी
बीपीएस महिला मेडिकल कॉलेज खानपुर में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की छात्रा मानुषी छिल्लर पिछले साल ही कॉलेज में एक कार्यक्रम में कैंपस प्रिंसिज चुनी गई थीं। उस समय कैंपस प्रिंसिज चुने जाने पर किसी ने नहीं सोचा होगा कि एक दिन यह मानुषी मिस वर्ल्ड बन जाएगी। लेकिन उसके कुछ दिन बाद ही मिस हरियाणा के लिए कंप्टीशन हुआ तो मानुषी ने उसमें हिस्सा लेकर खिताब अपने नाम कर लिया। उसके बाद मानुषी पीछे मुड़कर नहीं देखा और वह लगातार आगे बढ़ती चली गई। जून 2017 में फेमिना मिस इंडिया का खिताब अपने नाम किया तो अब मिस वर्ल्ड का ताज भी उसके सिर पर सज गया। इस तरह कॉलेज प्रिंसिज से मानुषी ने मिस वर्ल्ड तक के सभी खिताब पर लगातार कब्जा जमा लिया।
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मिस इंडिया बनते ही मिस वर्ल्ड का ताज देखने लगी थीं मानुषी
मानुषी छिल्लर ने फेमिना मिस इंडिया वर्ल्ड बनने के बाद ही मिस वर्ल्ड बनने का ताज देखना शुरू कर दिया था। मानुषी ने मिस इंडिया बनने के बाद कॉलेज में आकर बातचीत में यह साफ भी कर दिया था कि मिस इंडिया बनना उसके मिस वर्ल्ड के ताज तक पहुंचने की सीढ़ी है और वह मान रही है कि उसने एक सीढ़ी ओर पार कर ली। क्योंकि उसने मिस वर्ल्ड का ताज देखा है और उस ताज को अपने सिर पर रखना चाहती है। मानुषी ने उसके लिए ही एमबीबीएस की पढ़ाई करने की जगह कुछ महीने की छुट्टी ली थी और वह किसी भी तरह से मिस वर्ल्ड का खिताब जीतना चाहती थी।
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कॉलेज में मरीजों की सेवा भी करती थीं मानुषी
मानुषी छिल्लर भले ही कितने ऊंचे पायदान पर चढ़ती जा रही हो, लेकिन उनका व्यवहार हमेशा सेवा भाव वाला रहा है। यही कारण है कि वह कॉलेज में मरीजों की सेवा करती थीं और वह किसी को दर्द में नहीं देख सकती थीं। मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. पीएस गहलौत ने बताया कि मानुषी हमेशा मरीजों की सेवा के लिए आगे रहती थीं। उन्हें जिस तरह की जिम्मेदारी कॉलेज में सौंपी जाती थी, उसे वह बखूबी निभाती थीं।