किनसे मिली प्रेरणा
सौरभ स्वामी की मां पुष्पा स्वामी बीएड हैं और गृहिणी हैं तो पिता अशोक स्वामी महज आठवीं तक पढ़े हैं। दो बहनों के इकलौते भाई और साधारण परिवार से संबंध रखने वाले सौरभ स्वामी ने बताया कि वह तो इंजीनियर लग गए थे लेकिन पिता के शब्द कानों में प्रेरणा बनकर गूंजते रहे। सौरभ ने अपने पिता के जुझारूपन से प्रेरणा लेकर अपने आपको मजबूती दी और एकाग्रता से लक्ष्य पाने में जी जान को लगा दिया। यही नहीं, पढ़ाई के दिनों में पिता के काम में भी हाथ बंटाया। सौरभ 12वीं में 89 प्रतिशत अंकों के साथ पूरे चरखी दादरी में अव्वल आए। 2007 में 12वीं के बाद आईआईटी का क्रेज था। लेकिन आईआईटी की परीक्षा में प्रापर लिस्ट में नाम नहीं आ पाया। अगली लिस्ट में आया तो इस पर पिता अशोक स्वामी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन वह अपने पिता की नजरों को देखकर उनके मनोभाव को समझ गए और कुछ बड़ा करने का लक्ष्य बना लिया। आमतौर पर उनके पिता का कहना रहता था कि जीवन में कुछ बड़ा करके दिखाओ।
खुद पे यकीन सबसे ज्यादा जरूरी, प्लान बी भी रखें
सौरभ स्वामी का आईएएस में राजस्थान का कैडर रहा। पाली जिले में ट्रेनिंग के बाद उनकी प्रतापगढ़, गंगानगर में पोस्टिंग रही। वह फिलहाल फरवरी 2020 से राजस्थान के प्राथमिक शिक्षा निदेशालय और सेकेंडरी शिक्षा निदेशालय के डायरेक्टर की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। सौरभ स्वामी का कहना है कि यदि जीवन में आगे बढ़ना है तो खुद पर यकीन होना सबसे जरूरी है। लक्ष्य निर्धारित करें और प्लान ए के साथ प्लान बी भी साथ रखें। यदि प्लान ए कामयाब नहीं होता है तो उसी पर दौड़ने के बजाय प्लान बी पर काम करें। खुद की नजरों में खड़े रहना जरूरी है। अपने आप पर विश्वास करना सबसे बड़ी ताकत देता है।