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66 वर्ष की उम्र में जीत लिए 100 मैडल, मुकाबले के लिए जज्बा अभी भी बरकरार

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दौड़ लगाते रानियां तहसील के गांव अभोली निवासी गुरदीप सिंह। - फोटो : Sirsa
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सिरसा। कहते हैं खेलने व कूदने की एक उम्र होती है। और इंसान जब 60 के करीब हो जाए तो आराम की मुद्रा में आ जाता है। लेकिन रानियां तहसील के अभोली गांव के गुरदीप सिंह 66 की उम्र में भी जवानों सा हौसला रखते हैं। देश व विदेश में कई प्रतियोगिताओं में भाग लेकर करीब 100 मेडल जीत चुके हैं। दौड़ने के प्रति उनका इतना जुनून है कि नाती-पोते खिलाने की उम्र के इस दौर में भी वे भी प्रति दिन इसका अभ्यास जारी रखते हैं।
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जिले के रानियां तहसील के अभोली निवासी गुरदीप सिंह किसान परिवार से संबंध रखते हैं। हाल ही रतिया में 27 मार्च 2022 को हुई 5वीं मेगा खेल प्रतियोगिता में भाग लिया। गुरदीप ने 10 किलोमीटर वॉक और 200 मीटर दौड़ में प्रथम स्थान पर रहते हुए गोल्ड मेडल जीता। एथलीट गुरदीप सिंह ने बताया कि वह युवा अवस्था में कबड्डी का खिलाड़ी रह चुका है। लेकिन उम्र बढ़ने के बाद इस खेल को छोड़ दिया था। करीब 6 वर्ष पहले अखबार में एक वृद्ध खिलाड़ी की कहानी पढ़ी तो सोच लिया कि जब यह कर सकता है तो तूं क्यों नहीं कर सकता। इसके पश्चात भाग मिल्खा भाग फिल्म देखी तो उससे इतना प्रभावित हुआ की दौड़ने लगा। बस इसके बाद हर प्रतियोगिता में हिस्सा लेता गया और पदकों की संख्या बढ़ती चली गई। संवाद
मिल्खा सिंह से मिलने का सपना था
गुरदीप सिंह का कहना है कि वह मिल्खा सिंह से इतने प्रेरित था कि वह उसे अपना गुरु मानता था और उनसे एक बार मिलने का सपना था। अफसोस उसकी यह तमन्ना पूरी होती इससे पहले ही भारत के खेलों के रत्न मिल्खा सिंह इस दुनिया से अलविदा हो गए।
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2019 में श्रीलंका में आयोजित नेशनल प्रतियोगिता में जीते 3 मेडल
गुरदीप ने वर्ष 2019 में श्रीलंका में आयोजित अंतरराष्ट्रीय एथलीट प्रतियोगिता में 3 मेडल जीते। इसमें 300 मीटर बाधा दौड़ प्रतियोगिता में गोल्ड, 5 किलोमीटर पैदल चाल में सिल्वर व 100 बाधा दौड़ में तीसरा स्थान प्राप्त कर कांस्य पदक जीता।
सीनियर सिटीजन के लिए खेल श्रेणी
सीनियर सिटीजन के लिए आयोजित होने वाले खेलों की श्रेणी मास्टर गेम होती है, जिसमें 35 वर्ष से लेकर 100 वर्ष तक का व्यक्ति भाग ले सकता है। जिनमें गुरदीप सिंह का मुकाबला 65 वर्ष के साथ होता है। इस प्रतियोगिता में सभी प्रतिभागी एक साथ दौड़ते है और उन्हें श्रेणी के अनुुसार छांट लिया जाता है। गुरदीप के पास इस समय करीब 100 मेडल हैं, जिनमें 40 गोल्ड, 30 सिल्वर व 30 ही कांस्य पदक हैं।
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