- मंडी में किसानों की फसल अलग-अलग रखने के आदेश, उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
कालांवाली। धान सीजन शुरू होने से पहले मार्केट कमेटी कालांवाली ने मंडी के आढ़तियों को लिखित दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनका उद्देश्य मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना है। साथ ही किसानों को फसल बिक्री के दौरान होने वाली परेशानियों से बचाना भी है।
मार्केट कमेटी का कहना है कि नियमानुसार खरीद से किसानों को उचित मूल्य मिलेगा। मजदूरों को पूरी मजदूरी और शैलर संचालकों को गुणवत्तापूर्ण माल मिल सकेगा। पिछले सीजन में मार्केट कमेटी कालांवाली के खरीद केंद्रों पर धान खरीद में अनियमितताओं के आरोप लगे थे।
इसके बाद प्रदेश सरकार के प्रधान सचिव ने कालांवाली का निरीक्षण भी किया था। बावजूद इसके किसानों और शैलर संचालकों ने व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे।
अलग-अलग किसानों की अलग रहेगी ढेरी
मार्केट कमेटी सचिव नरेंद्र कुंडू ने आढ़तियों को निर्देश दिए हैं। अलग-अलग किसानों की कृषि उपज को मिलाकर एक ढेरी नहीं बनाई जाएगी। प्रत्येक किसान द्वारा लाई गई फसल की ढेरी अलग-अलग लगाई जाएगी। किसी भी स्थिति में अलग-अलग किसानों की उपज को आपस में मिलाना मना है। फसल को एक साथ मिलाने से नमी ठीक से सूख नहीं पाती। इससे फसल खराब होने की संभावना रहती है। अलग-अलग किसानों की फसल का सही वजन और गुणवत्ता निर्धारित करने में भी परेशानी आती है। इसलिए प्रत्येक किसान की उपज की सफाई, सुखाई, बोली और तुलाई अलग-अलग करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे फसल की गुणवत्ता का सही आकलन होगा। नमी के कारण होने वाले नुकसान से किसानों को बचाया जा सकेगा।
मंडी के बाहर तुलाई पर जे-फॉर्म नहीं
मार्केट कमेटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि मंडी परिसर के बाहर ट्रॉलियों की तुलाई के आधार पर किसी आढ़ती द्वारा जे-फॉर्म जारी नहीं होगा। सभी आढ़तियों को इलेक्ट्रॉनिक कांटों से ही किसानों की फसल की तुलाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जारी दिशा-निर्देशों की अवहेलना करने वाले आढ़ती के खिलाफ कार्रवाई होगी। यह कार्रवाई कृषि उपज मंडी अधिनियम एवं नियमों के तहत की जाएगी।
खरीद एजेंसियों और किसानों की मांगें
शैलर संचालकों ने खरीद एजेंसियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि एजेंसियां साफ-सुथरा और निर्धारित मानकों के अनुरूप धान खरीदें। वे समान मात्रा में मीलिंग के लिए शैलर संचालकों को उपलब्ध करवाएं। इससे शैलर संचालक भी सरकार को गुणवत्तापूर्ण चावल दे सकेंगे। धान खरीद में संभावित गड़बड़ियों को लेकर 16 सितंबर को पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघ एवं भारतीय किसान यूनियन ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा था। किसानों ने आरोप लगाया था कि हर साल नमी के नाम पर उनकी फसल में कटौती होती है। निजी मशीनों और धर्मकांटों पर वजन से उन्हें नुकसान होता है। किसानों ने प्रशासन से खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और उचित मूल्य दिलाने की मांग की थी।