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कड़ाके की ठंड ने बढ़ाई ठिठुरन, दिन भर नहीं हुए सूर्य के दर्शन

Sat, 31 Dec 2016 12:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
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शीत लहर - फोटो : bureau
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दो दिन से जारी शीत लहर का प्रकोप शुक्रवार को और अधिक बढ़ गया। सुबह-सवेरे घने कोहरे से वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ गई। लोगों ने अलाव सेककर ठंड से बचने का प्रयास किया। कामकाजी लोगों को सुबह-सवेरे ठिठुरते हुए काम पर जाते देखा गया। दोपहिया वाहन चालकों के लिए ठंड मुसीबत बनी रही। कोहरे के कारण बसें और ट्रेनें लेट हो गईं।
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शुक्रवार को भी धुंध के साथ सुबह-सवेरे तेज हवा भी चली, जिस कारण ठिठुरन बढ़ गई। शीत लहर चलने से दिन भी ठिठुरन जारी रही। दिन भर सूर्य के दर्शन नहीं हुए। कोहरे के कारण बसें और ट्रेनें निर्धारित समय से लेट पहुंची। सभी वाहनों की रफ्तार धीमी रही। दोपहर 12 बजे तक धुंध छाई रही, लेकिन उसके बाद भी धूप नहीं निकली। कोहरे से जनजीवन प्रभावित होने लगा है।

मौसम के जानकारों के अनुसार अब लगातार धुंध छाएगी, जो जनवरी मध्य के बाद तक जारी रहेगी। कड़ाके की ठंड के चलते मूंगफली, गज्जक, रेवड़ियां, सूप आदि की बिक्री बढ़ गई है। गर्म वस्त्रों की दुकानों पर भी भीड़ दिखाई देने लगी है। दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू, जयपुर, हरिद्वार आदि लंबे रूटों पर चलने वाली बसें एक से डेढ़ घंटे तक देरी से पहुंच सकी। रोडवेज महाप्रबंधक राम कुमार का कहना है कि धुंध के कारण बसों की गति धीमी रखनी पड़ती है। चालकों को उचित सावधानियां बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
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कामकाजी लोगों को ठिठुरते हुए ही घरों से निकलना पड़ रहा है तो बुजुर्ग रजाई में ही दुबके रहे। ठंड के मद्देनजर प्रदेश सरकार ने सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों की 25 दिसंबर से आठ जनवरी तक छुट्टियां घोषित कर दी हैं। आज का अधिकतम तापमान 24.1 डिग्री सेल्सियस रहा तो न्यूनतम तापमान 8.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। शनिवार को पारा दो से तीन डिग्री तक और गिरने की उम्मीद है।

गेहूं की फसल को सबसे अधिक फायदा
किसान वर्ग खुश दिखाई दे रहा है। यह धुंध फसलों के लिए घी का काम करेगी। गांव दड़बा के किसान ओमप्रकाश सुथार ने बताया कि ठंड से ही गेहूं और सरसों की फसलों का उत्पादन बढ़ता है। अब जो धुंध पड़ रही है इससे गेहूं और सरसों की फसलों में फुटाव अधिक होगा और बीमारियों की चपेट से बची रहेंगी, जिससे उत्पादन बढ़ना स्वाभाविक है।

इसी प्रकार कृषि विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र शेरड़िया ने बताया कि सर्दी की फसलों के लिए धुंध आवश्यक होती है, विशेष कर गेहूं की फसल के लिए। जिले में इस बार तीन लाख हेक्टेयर में गेहूं और 50 हजार हेक्टेयर में सरसों की बिजाई हुई है।
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