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पाप बढ़ते हैं तो भगवान स्वयं अवतरित हो करते हैं अंत : दाधिच

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 कथा सुनाते शास्त्री जयदेव।
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बडागुढ़ा। गांव फतेहपुरिया नियामत खां में स्थित श्री श्याम गोशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का श्रद्धालु भरपूर लाभ उठा रहे हैं। कथा के पांचवें दिन कथावाचक ने श्रद्धालुओं को कथा में भगवान श्री कृष्ण के जन्म एवं उनकी बाल लीलाओं का प्रसंग सुनाया। कथावाचक शास्त्री जयदेव दाधिच ने कहा कि जब धरती पर पाप बढ़ते हैं तो स्वयं अवतरित होकर उनका अंत करते हैं।
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उन्होंने कहा कि भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज करते थे। उनके अत्याचारी पुत्र कंस ने उन्हें कारागार में डाल दिया और स्वयं राजा बन बैठा। कंस की एक चचेरी बहन थी देवकी। जिसका विवाह उसने अपने मित्र वासुदेव नामक यदुवंशी राजा के साथ किया। जब कंस अपनी बहन देवकी को उसकी ससुराल पहुंचाने जा रहा था तो रास्ते में उसे आकाशवाणी सुनाई दी कि तूं जिस देवकी को छोड़ने जा रहा है इसी देवकी की 8वीं संतान सर्वनाश का कारण बनेगी। यह सुनकर कंस वासुदेव को मारने के लिए बढ़ा तो देवकी ने कंस ने प्रार्थना करते हुए कहा कि वह वासुदेव को छोड़ दें। उनके जो भी संतान होगी उसे व उसे सौंप देंगे।
कंस ने इस बात को मानते हुए वासुदेव और देवकी को कारागार में डाल दिया। कंस ने एक-एक कर देवकी की 7 संतानों को मार दिया। कंस के अत्याचारों से उसकी प्रजा भी काफी दु:खी थी। कथावाचक ने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर पाप-अत्याचार बढ़ते हैं और धर्म की हानि होती है तो भगवान स्वयं अवतार लेते हैं और उसका अंत करते हैं। कंस के पाप का घड़ा भर चुका था। इसलिए भगवान ने भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष के आठवें दिन माता देवकी की कोख से श्री कृष्ण के रूप में 8वीं संतान के रूप में जन्म लिया।
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