ओढां। गांव नुहियांवाली में स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में चल रहे सात दिवसीय भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर के पांचवें दिन की विभिन्न गतिविधियों करवाई गई। शिविर में संस्कृति की सराहना, सुनने के कौशल का विकास तथा सशस्त्र बलों, स्वतंत्रता सेनानियों, कलाकारों, प्रतिष्ठित लोगों आदि से स्थानीय नायकों के बारे में जागरूक करना रहा। इस मौके पर विद्यालय की प्रधानाचार्या गुरवंत कौर ने कहा कि विदेशी संस्कृति के प्रभाव में आकर अपनी संस्कृति को कभी भूलना नहीं चाहिए।
इस अवसर पर नोडल अधिकारी व हिंदी प्रवक्ता पवन देमीवाल ने उपस्थित विद्यार्थियों के सुनने के कौशल के बारे में बताते हुए कहा कि सुनने का कौशल एक महत्वपूर्ण कौशल है जोकि जीवन के हर क्षेत्र में उपयोगी है। यदि आप अपने सुनने के कौशल को बेहतर बनाते हैं, तो आप अपने जीवन में बेहतर संबंध बना सकते हैं, अधिक ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं और अधिक प्रभावी ढंग से संवाद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सुनने के कौशल को बेहतर बनाने हेतु बातचीत के दौरान वक्ता पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।
वहीं इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या गुरवंत कौर ने संस्कृति की सराहना विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कृति की सराहना का अर्थ है विभिन्न संस्कृतियों को जानना, समझना एवं स्वीकार करना। इसमें अलग-अलग संस्कृतियों के मूल्यों, विश्वासों, रीति-रिवाजों और परंपराओं का सम्मान करना शामिल है। आप किताबों, फिल्मों, संगीत और अन्य मीडिया के माध्यम से अलग-अलग संस्कृतियों के बारे में जान सकते हैं। इसके साथ-साथ सभी संस्कृतियों का मान सम्मान भी करना चाहिए, यही हमारी भारतीय संस्कृति है।
वहीं पंजाबी प्रवक्ता बलविन्द्र सिंह ने बताया कि स्वतंत्रता सेनानियों, कलाकारों और प्रतिष्ठित लोगों जैसे स्थानीय नायकों के बारे में इन गतिविधियों का उद्देश्य गुमनाम नायकों की कहानियों को उजागर करना और उनकी उपलब्धियों का जश्न मनाना है। संगोष्ठियां, प्रदर्शनियां, व्याख्यान, और सामुदायिक भागीदारी कार्यक्रम जैसी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन कर इनके बारे में जागरूकता लाई जा सकती है।
इस अवसर पर अध्यापक सोहन लाल, रोहताश, प्रदीप मलिक, कुलदीप सिंह, जगतार सिंह व रजनी बाला सहित अन्य अध्यापक व विद्यार्थी मौजूद रहे।