पार्षद राजेंद्र कुमार ने लगाए थे भ्रष्टाचार के आरोप, बिना बनीं गलियों का भुगतान जारी करने का किया था दावा
शनिवार अलसुबह अधिकारियों ने ठेकेदार के साथ मिलकर कच्ची गलियों में सड़क बनाने का किया था प्रयास
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। वर्ष 2023 और 24 में वैध हुईं कॉलोनियों का विवाद गर्माता जा रहा है। इस मामले में सोमवार को बीएंडआर और मार्केटिंग बोर्ड के एसडीओ स्तर के अधिकारी यूसीएस 7 की सड़कों की जांच करेंगे। जांच के दौरान नगर परिषद के जेई , ठेकेदार व अन्य अधिकारी मौजूद रहेंगे।
दोनों विभाग के अधिकारियों की ओर सड़कों की पैमाइश के साथ-साथ उनकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। 88 लाख रुपये की लागत से हुए इस काम के कुछ भुगतान पूर्व में अधिकारियों ने किए थे जबकि आखिरी कुछ भुगतान 2026 में हुए हैं।
ऐसे में अब यूसीएस 7 की पुरानी डिटेल रिपोर्ट खंगालने में नगर परिषद के अधिकारियों के साथ-साथ पार्षद तक लगे हुए हैं। वहीं, इसी यूसीएस 7 मामले में शनिवार को ठेकेदारों ने अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर कच्ची सड़कों को बनाने का काम शुरू कर दिया गया था।
लोगों और पार्षद के विरोध के बाद काम रुकवा दिया गया। अब सोमवार को इन कॉलोनी की सभी सड़कों की जांच की जाएगी, जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।
हर कोई रिकॉर्ड जांचने में जुटा
जहां भाजपा पार्षद पहले ही यूसीएस की कॉलोनियों की जांच करवाने में जुटे हैं। वहीं, कांग्रेस के पार्षद भी अपने स्तर पर इस सारे मामले की पड़ताल में जुटे हैं। वे भी रिकॉर्ड जांच रहे हैं कि आखिरकार इन कॉलोनियों के भुगतान किस प्रकार हुए हैं। कौन-कौन इसमें शामिल हैं। हर कोई जानना चाहता है कि आखिरकार लाखों रुपये का बंटवारा किस-किस ने किया हैं। विकास कार्य के नाम पर यह सारा खेल कब से चल रहा हैं। इसलिए सभी पार्षद रिकॉर्ड की जांच अपने-अपने स्तर पर करने में जुटे गए हैं।
किसी ने लगाई मुहर तो किसी ने कर दिए महज साइन
सूत्रों की मानें तो गलियों में साइन करने वाले मौजूदा पार्षदों के नाम भी सामने आए हैं। इन पार्षदों ने भी अलग-अलग खेल रचा हुआ है। फाइलों के रिकॉर्ड में सामने आया है कि कई पार्षदों ने अपने साइन के साथ मुहर ही नहीं लगाई है। वहीं, कई पार्षदों ने मुहर के साथ साइन किए हैं। रिकॉर्ड में हैरान करने वाली बात यह है कि वर्ष 2023 व 2024 में टेंडर में आई इस कॉलोनियों में लगातार टाइम एक्सटेंशन दिया गया और काम वर्ष 2025 व 2026 तक ले आए। पूर्व में माइनस में लेने वाले कामों को ठेकेदार ने किस आधार पर अब कर दिया।