सिरसा। आंदोलनकारियों के हठ और प्रशासन की लापरवाही के चलते दो युवकों की जान चली गई। किसान आंदोलन के चलते पंजाब और राजस्थान की तरफ जाने वाले मुख्य रास्ते पिछले कई दिनों से बंद हैं। ऐसे में लोग समय बचाने के चक्कर में अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। ऐसे ही जल्दबाजी के चक्कर में सोमवार को दो युवाओं को अपनी जान गंवानी पड़ी। रेलवे ट्रैक पार कर रहे दो युवक गोरखधाम की चपेट में आ गए और उनकी मौत हो गई। विडंबना यह रही कि हादसे के बाद पुलिस प्रशासन ने घग्गर पुल को वन वे कर दिया।
बता दें कि घग्गर रेलवे ट्रेक पुल को पार करने के चक्कर में सोमवार को दो बाइक सवार सिरसा से बठिंडा जा रही गोरखधाम एक्सप्रेस की चपेट में आ गए। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं दो अन्य बाइक सवार बाइक ट्रैक पर छोड़कर भाग गए। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची रेलवे पुलिस ने दोनों के शव कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। वहीं रेलवे पुलिस दूसरे बाइक पर सवार युवकों की भी तलाश कर रही है। फिलहाल दोनों बाइक सवार लोगों के खिलाफ रेलवे पुलिस ने मामला दर्ज किया है। रेलवे पुलिस ने फिलहाल इस मामले में धारा 174 के तहत कार्रवाई की है।
बता दें कि गांव नाथौर के 52 वर्षीय डिप्टी पुत्र गुरदेव सिंह को शुगर की बीमारी थी। शुगर की दवा लेने के लिए वह 35 साल के गबरी उर्फ अमनदीप पुत्र मुख्तयार सिंह के साथ बाइक पर सिरसा आ रहे थे। दोनों चाचा भतीजा थे। गबरी गांव में ही सफाई कर्मचारी के पद पर कार्यरत है। किसान आंदोलन के चलते घग्गर पुल पर पुलिस ने नाका लगाकर उसे बंद किया हुआ है। ऐसे में कई ग्रामीण पुल से कुछ दूरी पर रेलवे ट्रैक पुल से घग्गर नदी को क्रॉस कर रहे हैं। इस दौरान दो अन्य बाइक सवार भी पुल क्रॉस करने के लिए जा रहे थे। यह दोनों भी उनके साथ हो लिए। खेतों में काम कर रहे लोगों के अनुसार डिप्टी व गबरी का बाइक आगे था और दूसरे युवकों का बाइक पीछे था। पुल के बीच में पहुंचने पर सामने से गोरखधाम ट्रेन आ गई। पीछे वाले युवक अपनी बाइक छोड़कर पुल से साथ बने केबिन में घुस गए। जबकि डिप्टी और गबरी दोनों आगे बने केबिन में नहीं पहुंच पाए और गोरखधाम सुपरफास्ट ट्रेन की चपेट में आ गए। जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस का नाके के कारण लोगों ने बना रखा था शॉर्टकट
ग्रामीणों ने बताया कि गांव खैरेकां स्थित घग्गर पुल पर किसान आंदोलन के चलते पुलिस ने नेशनल हाईवे 9 पर त्रिस्तरीय नाका लगाया हुआ है। जिसके बाद ग्रामीणों को 20 किलोमीटर कैलनियांवाली और नेजाडेलां घूमकर आना पड़ रहा था। ऐसे में कई ग्रामीण इस रेलवे पुल के ऊपर से दुपहिया वाहन गुजार रहे थे। ग्रामीण ट्रेन के टाइम के साथ मैच कर दिन भर इस पुल से गुजर रहे थे। ग्रामीणों की माने तो प्रतिदिन 100 के आस पास दुपहिया वाहन इस पुल से गुजरते थे। इस शॉर्टकट से वाहन चालक सीधे झोपड़ा हाईवे मोड पर पहुंच जाते थे। जो सीधे नेशनल हाईवे पर आ जाते हैं।
कुछ ऐसा था नजारा
घग्गर पुल पर बने रेलवे ट्रैक पुल के बीच में दो फुट के अंदर चद्दर लगी होती है। इसी की वजह से लोग दुपहिया वाहन आसानी से ट्रैक के ऊपर गुजार पाते हैं। इसके साथ ही पुल के पिल्लर के ऊपर तीन बाई चार के ओपन केबिन बने हुए हैं। इन केबिन में आसानी से चार से पांच लोग खड़े हो सकते हैं। इन्हीं केबिन में खड़े होकर दूसरे दो लोगों ने अपनी जान बचाई थी। जब पुलिस पहुंची तो ट्रैक के लिए बने पुल पर खून फैला हुआ था और मृतकों के अंग बिखरे हुए थे। एक युवक का आधा शव पुल के पिल्लर के नीचे बने बेस पर पड़ा हुआ था। दोनों बाइक भी अलग थलग पड़ी थी।
दो लोगों को गोरखधाम ट्रेन की चपेट में आने से मौत हुई है। दोनों को लेकर फिलहाल धारा 174 के तहत कार्रवाई अमल में लाई गई है। दोनों के शवों को मंगलवार को पोस्टमार्टम करवाया जाएगा। वहीं दूसरे बाइक के मालिकों की तलाश जारी है।
-रणबीर सिंह, थाना प्रभारी जीआरपी