सिरसा। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के आश्रम हुडा सेक्टर -20 में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। इस दौरान साध्वी नेहा भारती ने कहा कि हम बाहरी तौर पर तो आज़ाद हो गए हैं परंतु मानसिक रूप से आज भी गुलामी में जकड़े हुए हैं। स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ केवल बंधनों से मुक्त होना नहीं, बल्कि विचारों की स्वतंत्रता भी है। जब तक हमारा मन प्रश्न करना, सही-गलत को पहचानना और स्वयं निर्णय लेना नहीं सीखेगा, तब तक सच्ची आज़ादी अधूरी रहेगी। मन की गुलामी से मुक्त होना ही वास्तविक स्वतंत्रता है।
उन्होंने कहा कि संतों ने फरमाया है मन जीते जग जीत। मन के विचारों के कारण बुरी संगति के प्रभाव में फंस आज का युवा नशे की ओर जाकर अपना और अपने परिवार का जीवन बर्बाद कर रहा है। युवाओं को इसके लिए पूर्ण सतगुरु की शरण में जाकर ब्रह्म ज्ञान प्राप्त कर राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य पूरे करने चाहिए।
स्वस्थ और सफल जीवन के लिए नशे से दूर रहें
साध्वी ने कहा कि नशे की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि मन को आत्म बल मिले। नशा व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक जीवन पर गंभीर दुष्प्रभाव डालता है। नशीले पदार्थों के सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। मानसिक रूप से व्यक्ति चिड़चिड़ा, अवसादग्रस्त और असंतुलित हो जाता है। नशा परिवार और समाज में कलह का कारण बनता है और आर्थिक स्थिति भी बिगाड़ देता है। पढ़ाई और कार्यक्षमता पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। धीरे-धीरे व्यक्ति अपराध की ओर भी बढ़ सकता है। स्वस्थ और सफल जीवन के लिए नशे से दूर रहना अत्यंत आवश्यक है।