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महिला शौचालय को बना डाला स्टोर

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 सरकारी व्यवस्था की हद है। जनता की सुविधा के लिए जो व्यवस्था की जाती है, उस पर सरकारी कर्मचारी अपना कब्जा जमा लेते हैं। जनता भटकती रहती है, लेकिन उसकी तकलीफ से किसी को कोई मतलब नहीं। ऐसा ही हाल शहर की सबसे प्रमुख इमारत लघु सचिवालय का है।
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 लघु सचिवालय के भूतल (ग्राउंड फ्लोर) पर तहसील कार्यालय के पास बने महिला शौचालय पर कर्मचारियों ने अपना कब्जा जमा लिया है।

 शौचालय को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है और इसे स्टोर रूम व कैंटीन बना दिया गया है। यहीं पर अलमारी और बेंच रखे हैं, और चाय-पानी का भी इंतजाम है। इस वजह से लघु सचिवालय में आने वाली सैकड़ों महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें मजबूरी में सीढ़ियां चढ़कर फर्स्ट फ्लोर पर बने शौचालय में जाना पड़ता है।
 

संवाददाता ने जब लघु सचिवालय का दौरा किया तो पाया कि तहसील कार्यालय के पास बने महिला शौचालय पर कर्मचारियों ने अपना कब्जा जमाया हुआ है। यहां पर बेंच, रैक और अलमारी रखी गई है। रैक पर पानी की बोतल, गिलास, खाने का डिब्बा रखा हुआ था।
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 इससे साफ था कि इसे स्टोर और कैंटीन के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। वहीं, शौचालय का सारा सामान टूटा हुआ था। वहीं, यहां बने अंदर वाले शौचालय के गेट पर ताला लटका हुआ था।


लघु सचिवालय के प्रथम तल पर स्थित पुरुष शौचालय में सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। सफाई न होने के कारण पूरे भवन में बदबू फैलती रहती है। इससे आम लोगों को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

 पुरुष शौचालय कि भी हालत ऐसी है कि टूंटियां, पाइप, फ्लैश की टंकी से सामान गायब है, लेकिन कोई देखने वाला नहीं है। वॉशवेशन भी टूटे हुए हैं, उनके सामने लगे शीशे टूट चुके हैं, लेकिन ठीक करवाने की ओर किसी का ध्यान नहीं।



शौचालय में कैंटीन नहीं है, बस वैसे ही सामान रखा हुआ, चाय नहीं बनाई जाती। महिलाओं के लिए दूसरे तल पर व्यवस्था है भवन के दूसरी तरफ भी शौचालय बने हुए हैं। सफाई कर्मी तैनात है, जो दिन में दो से तीन बार सफाई करते हैं। टूटे हुए सामान की जगह नया लाने के लिए जिला उपायुक्त को लिखा गया है, जल्द सामान बदल दिया जाएगा।
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- ओपी बिश्नोई, तहसीलदार


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