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सिलेंडर तो टांग दिए, चलाने आते नहीं

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लघु सचिवालय के अग्निशमन सिस्टम में सामने आई लापरवाही से एक ओर जहां आग से सुरक्षा के लिए लगाए गए उपकरण चालू हालत में नहीं हैं तो उधर भवन में कार्यरत कोई ऐसा कर्मचारी भी नहीं है जिसने फायर प्रशिक्षण प्राप्त किया हो।

 कुल मिलाकर स्थिति स्पष्ट है कि भवन की सुरक्षा को लेकर अभी तक किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। दस वर्ष में किसी ने भी इस लापरवाही की ओर ध्यान ही नहीं दिया।  किसी अधिकारी या कर्मचारी को सुरक्षा को लेकर भय ही नहीं है। उधर भवन में कार्यरत अधिकतर कर्मचारी तो यह तक नहीं जानते कि हौजरील हौज हैं या कूड़ादान, अलार्म चलते हैं या नहीं।
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उन्हें तो केवल लगे हुए अलार्म व टंगे गैंस सिलेंडर दिखाई देते हैं। भवन में लगे उपकरणों की देखरेख के लिए फायर मैन की नियुक्ति भी आवश्यक है क्योंकि वहीं समय-समय पर इनकी जांच कर इन्हें दुरुस्त रखने में उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।


आग से सुरक्षा को लेकर एक ओर जहां उपकरणों में खामियां है तो दूसरी सबसे बड़ी चूक इस बात की है कि भवन में तैनात एक भी ऐसा कर्मचारी नहीं है जिसने फायर प्रशिक्षण प्राप्त किया हो।

 ऐसे में अगर कोई दुर्घटना होती है तो इन उपकरणों को संचालित करने वाला भी कोई नहीं है। भवन से दमकल विभाग की दूरी भी चार से पांच किलोमीटर है, ऐसे में दमकल विभाग के पहुंचने से पहले घटना गंभीर रूप ले सकती है।

 इस बारे में जब कर्मचारियों से बात की गई तो उनका कहना था कि हमें तो बस यह पता है कि गैस सिलेंडर टंगे हुए हैं, इन्हें चलाना तो दूर हाथ लगाने में डर लगता है।

सभी कार्यालयों में अलार्म लगे हुए है, हमने कौनसा चलाकर देखें हैं जो पता चले कि चालू हैं या नहीं। नाजर विभाग के कर्मचारियों का भी कहना है कि भवन में फायरमैन तैनात होना चाहिए, इसके अतिरिक्त सभी कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए ताकि आवश्यकता पड़ने पर इन उपकरणों को संचालित किया जा सके।

 हमें तो कुछ समय पहले ही पता लगा है कि पानी ऊपरी मंजिलों तक पहुंचाने के लिए हौज लगे हुए हैं। पहले तो हम इन्हें कूड़ादान ही समझ रहे थे।


इस बारे में जब फायर अधिकारी जगदीश चंद्र गिल से बात की गई तो उनका कहना था कि कर्मचारियों में प्रशिक्षण की कमी सच में गंभीर बात है। उन्होंने बताया कि वह तो दो से तीन फायर अधिकारियों की नियुक्ति करने की सलाह भी दे चुके हैं।

क्योंकि इससे एक तो सभी उपकरणों की जानकारी होने पर उनकी देखरेख अच्छी तरह की जा सकेगी, कोई कमी होने पर तुरंत ठीक करवाया जा सकेगा। उधर किसी अप्रिय घटना होने पर वह उपकरणों का उच्च इस्तेमाल कर सकेंगे।
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 उन्होंने बताया कि कर्मचरियों के लिए प्रशिक्षण शिविर लगाने के बारे में उपायुक्त डॉ. अशंज सिंह से कहा गया है। उनका कहना है कि जल्द ही ऐसा शिविर आयोजित किया जाएगा, जितना अधिक लोग इसका प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे उतना ही लाभ होगा।
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