रोड़ी। आखिरकार गांव रोड़ी के ग्रामीणों का अपने जवान बेटों और भाईयों की मौत देखकर सब्र का बांध टूट ही गया। शुक्रवार को रोड़ी के हर गली मोहल्ले से बाहर निकलकर महिलाएं और पुरुष रोड़ी थाने पहुंचे। सभी ने एक सुर में पुलिस ने नशा बेचने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और युवाओं को नशा मुक्ति केंद्र से उपचार करवाने के लिए कहा।
इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने कहा कि वह हर उस व्यक्ति की जानकारी देंगे, जो रोड़ी में नशा बेचता है। इसको लेकर लोगों ने रोड़ी थाना प्रभारी इंस्पेक्टर जनक सिंह को ज्ञापन भी सौंपा। रोड़ी क्षेत्र में जनवरी से अप्रैल माह क बीच नशे से सात मौत हो चुकी हैं। इस संबंध में आठ अप्रैल को अमर उजाला में भी खबर प्रकाशित हुई थी। अब लोगों में भी नशे के खिलाफ अलख जगने लगी है।
गौरतलब है कि रोड़ी थाना पुलिस और रोड़ी के लोगों के बीच आपसी तालमेल की कमी थी। इसी कारण बड़े स्तर पर नशा बढ़ रहा था। ऐसे में शुक्रवार महिलाएं और पुरुष थाने पहुंचे और थाना प्रभारी से सहयोग करने की बात कही। थाना प्रभारी ने उन्हें आश्वासन दिया कि इस मामले में वह सख्त कार्रवाई करेंगे। बशर्ते लोगों का सहयोग मिले।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में चिट्टा बेचने वालों की जानकारी पुलिस को ग्रामीण देंगे। पुलिस उन पर कार्रवाई करें। वह अपने बच्चों को नशे की दलदल में फंसने से रोकना चाहते हैं। उन्होंने पुलिस से गुहार लगाई कि वह नशा करने वाले युवाओं को नशा मुक्ति केंद्रों में पहुंचाने में मदद करें, ताकि युवाओं को बचाया जा सके।
रोड़ी के पूर्व सरपंच मेजर सिंह तरसेम सिंह दंदीवाल, नाजर प्रेमी, सुखवीर कौर, सुखपाल कौर, जसवीर कौर, कुलविंद्र, सवित्रि, कुलविंद्र कौर, नसीब कौर आदि ने बतया कि गली-मोहल्ले में सरेआम चिट्टा नामक नशा बेचने वाले घूमते है। कुछ लोग अपने घरों से नशा बेचने का व्यापार चलाते है। कुछ पैसों के लालच में वह उनके बच्चों को नशे की आदत लगाकर खत्म करने का काम कर रहे है। जो अब बर्दाश्त नहीं होता है।
थाना प्रभारी इंस्पेक्टर जनक सिंह ने कहा कि नशा मुक्त गांव बनाने के लिए पुलिस ने भी अभियान चलाया हुआ है। गांव में चिट्टा नशा बेचने वालों की सूचना पुलिस को दें, जानकारी गुप्त रखी जाएगी। आमजन भी पुलिस को सहयोग करें ताकि गांव में चिट्टा बेचने वालों को काबू किया जा सके। युवाओं को नशा छुड़ाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
रोड़ी में चिट्टे से सबसे ज्यादा होती है मौत
रोड़ी का एरिया पंजाब बॉर्डर के साथ लगता है। कभी पूरी तरह से राजनीतिक तौर पर सक्रिय रहने वाले रोड़ी हलके में अब नशा पूरी तरह से छा गया है। नशे के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। इस कारण एक साल में 50 से ज्यादा नशे से युवाओं की मौत होती है। सभी चिट्टे-हेराइन का नशा करते हैं। अहम बात यह है कि 20 से 25 साल के युवाओं की इस नशे से मौत हो रही है। परिजन अपने बच्चों को अपने सामने मरते हुए देखकर भी कुछ नहीं कर सकते है। कई परिवार ऐसे है, जिनके कमाने वाला ही नहीं बचा है।