ओढां। गांव नुहियांवाली में पिछले कुछ दिनों से बेसहारा पशुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे क्षेत्र के किसान गंभीर परेशानी का सामना कर रहे हैं। कुछ लोग एक-दूसरे गांवों से पशुओं को वाहनों में भरकर यहां छोड़ रहे हैं, जिससे गांव और आसपास के इलाकों में पशुओं की भरमार हो गई है।
बेसहारा पशु खेतों में घुसकर किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि किसानों को ठंड के मौसम में भी अपने खेतों में डेरा डालना पड़ रहा है। मजबूरन किसान दिन के साथ-साथ रात में भी फसलों की रखवाली कर रहे हैं, जिससे उनकी दिनचर्या और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
उधर, गोशाला प्रबंधक कमेटी ने भी अपनी सीमाओं से प्रशासन और ग्रामीणों को अवगत कराया है। कमेटी का कहना है कि गोशाला में फिलहाल 628 गोवंश मौजूद हैं और वहां स्थान की व्यवस्था सीमित है। ऐसे में और अधिक गोवंश को रखने में परेशानी आएगी। कमेटी ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन अपने स्तर पर सहयोग कर गोवंश को रखने की व्यवस्था करता है, तो इस पर विचार किया जा सकता है, लेकिन बिना किसी सहायता के अतिरिक्त गोवंश रखने से गोशाला की आर्थिक स्थिति पर बोझ पड़ेगा।
बेसहारा पशुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए गोशाला कमेटी ने सख्त निर्णय लिया है। कमेटी के अनुसार अब रात्रि के समय युवा सदस्य गांव के मुख्य रास्तों पर पहरा देंगे। यदि इस दौरान कोई व्यक्ति गोवंश को छोड़ते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करवाई जाएगी। ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि बेसहारा पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए, ताकि किसानों की फसलें सुरक्षित रह सकें और गांव में व्यवस्था बनी रहे। संवाद
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कोट्स
गोशाला में पहले से ही काफी संख्या में गोवंश है। पिछले कुछ दिनों से गांव में बेसहारा गोवंश बढ़े हैं। शुक्रवार रात्रि को भी कोई वाहन में भरकर गोवंश गांव में छोड़ा गया है। ये गोवंश किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। इसके लिए गोशाला कमेटी के सदस्य युवा रात्रिकालीन पहरा देंगे। गांव में जो बेसहारा गोवंश घूम रह हैं, अगर प्रशासन इनकी टैगिंग करवाकर गोशाला में छोड़ता है तो कमेटी गोवंश को रख सकती है।
- सुभाष बिजारणियां, सचिव, गोशाला, नुहियांवाली।
दूसरे गांव के रखवाले लोग बेसहारा पशुओं को रात के समय एक से दूसरी जगह लोग छोड़ देते हैं। इसका पता कर ऐसे लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। गाय की सेवा करना हमारा धर्म है, लेकिन गोशाला में भी एक सिस्टम है। ग्रामीण गोशाला में दान-चंदा देते रहते हैं, लेकिन प्रतिदिन गांव में बेसहारा पशु आ रहे हैं। गोशाला कमेटी व ग्रामीणों को बैठक कर कोई न कोई हल निकालना चाहिए। अन्यथा भूखा गोवंश किसानों की फसल तो उजाड़ेगा ही।
- जगदीश नेहरा, ग्रामीण, नुहियांवाली।
गोशाला पर निर्भर रहना ठीक नहीं है। ये समस्या पूरे गांव की है। गांव में पहरा लगना चाहिए। जो बेसहारा पशु बाहर से छोड़े गए हैं, उनके लिए ग्रामीण आपसी विचार-विमर्श कर एक अलग से पशुबाड़ा बनाएं। इसके लिए पंचायत कोई न कोई इंतजाम करने में पूरा सहयोग करेगी। वहीं पंचायत गोशाला कमेटी का पहले भी हर संभव सहयोग करती रही है। बाहरी लोग इधर-उधर पशु छोड़ते हैं, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।
- आत्माराम, सरपंच प्रतिनिधि, गांव नुहियांवाली।
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रखवाली के लिए रखे गए समुदाय विशेष के लोगों को रखते है, वह गोवंश पर अत्याचार करते हैं। हालात यह है कि लोग चलते वाहन से गोवंश को फेंक दिया जाता है। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इससे न केवल सड़क दुर्घटनाएं बढ़ती हैं बल्कि किसानों की फसल भी बर्बाद होती है। गांव नुहियांवाली के लोगों, गोशाला कमेटी व पंचायत को बैठकर इस विषय में ऐसा कोई समाधान निकालें।
- योगेश बिश्नोई, जिलाध्यक्ष, गोशाला महासंघ।