सिरसा। शहर के बरनाला रोड पर दोपहर को उस समय जमकर हंगामा हो गया जब बिजली निगम की टीम एक दुकान का कनेक्शन काटने पहुची। एक बार तो जाम की स्थिति भी बन गई। हंगामे का कारण बिजली निगम की टीम की ओर से गलत डिटेल के आधार पर दुकान का कनेक्शन काटने के लिए पहुंचना था।
बिजली निगम के जेई टीम के साथ शनिवार दोपहर को किसान मैराथन स्पोर्ट्स की दुकान का बिजली मीटर काटने के लिए पहुंच गए। टीम पहुंची तो दुकानदार ने कहा कि अभी तो बिल भरा है। आप कैसे बिजली कनेक्शन काटने पहुंच गए। इस पर दोनों पक्षों में बहस हो गई। बिजली निगम के अधिकारी जहां अपनी डिटेल पर अड़े रहे, वहीं दुकानदार ने किसान नेताओं को बुला लिया। जिसके बाद करीबन आधे घंटे तक जमकर हंगामा हुआ। बिजली निगम के अधिकारियों ने जब कार्यालय से अपनी सूची का सत्यापन करवाया तो दुकानदार का बिल भरा हुआ पाया। तकनीकी खामी के चलते उसका नाम लिस्ट में दर्ज हो गया। बिजली निगम के अधिकारियों ने अपने विभाग की गलती मानी और मामले को खत्म किया।
हैरानी की बात है यह कि अधिकारी भले ही तकनीकी खामी की बात करते हैं, लेकिन हकीकत में लिस्ट को सत्यापित नहीं किया गया। जिसके कारण बिजली का बिल भरने के बाद भी उपभोक्ताओं को निगम ने डिफाल्टर की सूची में डाल दिया। इस कारण जहां निगम की कार्यप्रणाली पर किसान नेताओं ने सवाल उठाए।
यह है मामला
किसान मैराथन स्पोर्ट्स के नाम से दुकान के मालिक गुरदीप सिंह ने बताया कि दोपहर तीन बजे के सरकारी गाड़ी दुकान के आगे आकर रूकी। उसमें से तीन-चार लोग आए और बोले आपने अपना बिजली का बिल नहीं भरा है। बिजली निगम के रिकॉर्ड में आप डिफाल्टर है। आपका कनेक्शन काटा जाएगा। उनको बताया कि मैंने तो अपना 27 हजार रुपये का बिल भरा हुआ है। आप अपने रिकॉर्ड की जांच करें। कर्मचारी ने बताया कि उसका नाम बाबूलाल है और वह जेई के पद पर है। आप अपना बिल और मीटर चैक करवाओ। वरना मीटर उखाड़कर ले जाएंगे। इस पर दुकानदार ने किसान नेताओं को बुला लिया। मौके पर पहुंचे किसान नेताओं ने कहा कि आप लोग अपना रिकॉर्ड ऑनलाइन जांच सकते हैं। इससे साफ हो जाएगा कि बिल भरा हुआ है या नहीं। इस पर जेई बाबूलाल भरे हुए बिल की रसीद दिखाने की बात पर अड़ गए। इससे बहस बढ़ गई।
जेई ने कहा कि वह 42 लोगों की लिस्ट लेकर आए हैं, सभी डिफाल्टर हैं। बिल भरा है तो रसीद दिखाने में क्या जाता है। कई देर बहस होने के बाद टीम के अन्य सदस्यों ने बिल की जांच करवाई। जिसमें बिल भरा हुआ पाया गया और पता चला कि संबंधित व्यक्ति का गलती से नाम लिस्ट में आ गया है। जेई ने इस पर मामला शांत करते हुए कहा कि गलती से संबंधित दुकानदार का नाम इस लिस्ट में आ गया है। इसलिए हम पूरी लिस्ट की जांच करवाएंगे। इस पर गलती मानते हुए टीम के सदस्य मौके से चले गए।
लिस्ट में संबंधित व्यक्ति का नाम था और पूर्व में बिल नहीं भरा हुआ था। इसलिए मौके पर कनेक्शन काटने के लिए आए थे। लिस्ट की दोबारा जांच करवाई जाएगी। यदि किसी अन्य व्यक्ति का नाम है तो उसे भी हटाया जाएगा।
बाबूलाल, जेई, बिजली निगम
मैंने सितंबर माह में 27 हजार रुपये का बिल भरा है। अक्तूबर का चार-पांच दिन पहले ही बिल आया है। जिसकी अभी तक अंतिम तिथि नहीं गई है और बिजली निगम के जेई कनेक्शन काटने पहुंच गए। जब उन्होंने लिस्ट जांची तो मेरा नाम गलत आया हुआ था। हैरानी की बात है कि ऑनलाइन सिस्टम होने के बाद भी गलत लिस्ट बनाकर लोगों को तंग किया जा रहा है।
गुरमीत सिंह, दुकानदार