जिला जेल में पिछले कुछ समय हो रही संदिग्ध गतिविधियों के चलते उप-अधीक्षक के नेतृत्व में भारी पुलिस बल ने रविवार सुबह जेल में दबिश दी और जेल परिसर का चप्पा-चप्पा खंगाल मारा।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक मितेश जैन के आदेशानुसार योजना बद्ध तरीके से की गई थी। तलाशी अभियान में डीएसपी धर्मवीर सिंह, सीआईए प्रभारी जोगेंद्र सिंह सहित करीब 100 पुलिसकर्मचारी शामिल थे।
तीन घंटे तक चले अभियान के दौरान पुलिस को हवालाती बैरक से तीन सिम कार्ड व एक मोबाइल फोन मिला।
जानकारी के अनुसार जेल में मादक पदार्थ, मोबाइल फोन मिलने व लड़ाई झगडे़ होने की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है।
इसी के चलते पुलिस अधीक्षक मितेश जैन को जेल के अंदर की प्रतिविधियों के बारे में काफी गुप्त सूचनाएं मिल रही थी।
पुलिस अधीक्षक में औचक तलाशी अभियान छेड़ने की योजना बनाई और पुलिस अधिकारियों की बैठक बुलाकर डीएसपी सिटी धर्मवीर सिंह के नेतृत्व में टीम गठित की।
इस टीम में सीआईए स्टाफ प्रभारी इंस्पेक्टर जोगेंद्र सिंह, साइबर सेल प्रभारी गौरीशंकर शर्मा ,नारकोटिक सेल अधिकारी राजेश कुमार का शामिल किया गया।
तय समय अनुसार सुबह पुलिस लाइन से भारी पुलिस फोर्स के साथ टीम ने जेल करीब 11 बजे दबिश दे डाली। औचक तलाशी को देखकर जेल प्रशासन के अधिकारी भी सकते में आ गए। पुलिस अधिकारियों ने जेल अधिकारियों को साथ लेकर अभियान शुरू किया।
बैरकों, शौचालयों व भोजनालय की तलाशी
पुलिस ने जब दबिश दी तो कैदी व हवालाती जेल मैदान में इधर-उधर बैठे हुए थे। भारी पुलिस बल देख वे भी हैरान रह गए और इधर-उधर खिसकने लगे।
पुलिस ने अलग-अलग टीम बना ली। एक टीम ने पार्क या परिसर में टहल रहे बंदियों की तलाशी लेने शुरू की। दूसरी टीम हवालाती व कैदियों के बैरकों को खंगालने में जुट गई।
ज्यादा टाइम बैरकों के शौचालयों में लगा। बैरकों में पड़े बंदियों के सामान की भी अच्छी तरह से तलाशी ली गई, लेकिन पुलिस के हाथ कुछ भी नहीं लगा।
पुलिस कर्मचारी भोजनालय में गए और वहां रखे सारे बर्तनों को जांचा। पुलिस वालों ने रजाइयों के गलेप तक उतार लिए परंतु अफीम तो क्या नींद की एक गोली भी पुलिस वाले तलाश नहीं कर सके।
दस मिनट पहले ही पहुंच गई थी सूचना
दस मिनट पहले ही औचक तलाशी की सूचना जेल में पहुंच चुकी थी। इसके बाद जेल में मौजूद मादक पदार्थ, मोबाइल फोन और गोलियों के पैकेट ठिकाने लगाने में पांच मिनट से भी कम लगा।
जेल सूत्रों के अनुसार पुलिस कर्मचारी पुरानी परंपरा अनुसार ही वहां-वहां तलाशी ले रहे थे जहां हर बार ली जाती है। जेल परिसर में खेती के लिए काफी भूमि है।
फलदार व छायादार पेड़ों की संख्या भी अच्छी खासी है। सूचना मिलते ही बंदियों ने अपनी-अपनी जगह पर माल छिपा दिया और पुलिस बैरकों, बाथरूम वे रसोई घर की तलाशी लेती रही।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह सच है कि हर बार यही होता है। तलाशी अभियान की सूचना पहले से ही जेल में पहुंच जाती है।
तीन घंटे के अभियान में मिला सिर्फ एक मोबाइल
अभियान के बाद जेल से बाहर आए पुलिस कर्मचारियों का कहना था कि कुछ भी नहीं मिला। अंत में जेल से बाहर आए डीएसपी धर्मवीर सिंह बताया कि जेल में एक मोबाइल फोन व तीन सिम कार्ड मिले हैं।
जब उनसे पूछा गया कि ये मोबाइल जेल में किस के पास और कहां मिला तो उनके पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। उन्होंने कहा कि एक से आठ नंबर बैरक में से किसी एक में मिला है। एक से आठ नंबर बैरक हवालाती बैरक हैं।
नहीं आई कोई शिकायत
जेल हुडा चौकी क्षेत्र में पड़ती है। हुडा चौकी के कार्यवाहक प्रभारी अशोक कुमार ने बताया कि इस अभियान में हुडा चौकी पुलिस को शामिल नहीं किया गया था।
इसके अलावा जेल अधिकारियों की तरफ से उनके पास कोई शिकायत नहीं भेजी गई है जिसके बिना पर हम यह कह सके कि जेल में मोबाइल व सिम कार्ड मिले हैं। अभी तक कोई शिकायत नहीं आई है। शिकायत मिलने पर ही कार्रवाई की जाएगी।