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जिला को मिलेगी मिट्टी व पानी जांच की नई मशीन, एक साथ होंगे कई टेस्ट

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लैब में की जा रही मिट्टी व पानी की जांच। - फोटो : Sirsa
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सिरसा। जिले के किसानों के लिए अच्छी और राहत भरी खबर है। कृषि विभाग की ओर से लैब में जल्द ही नई मशीन उपलब्ध करवाई जाएगी। इसके बाद पहले से चार गुणा ज्यादा सैंपल की जांच की जा सकेगी। इससे क्षेत्र के किसानों को सीधा लाभ होगा। जिले में बनी मिट्टी व पानी जांच की लैब को 3 दशक का समय हो चुका है। मौजूदा समय में हर रोज मिट्टी व पानी के करीब 20 से 25 सैंपल जांच के लिए आते हैं।
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कृषि विभाग स्थित लैब का निर्माण वर्ष 1992 में किया गया। जिले भर से अनेक किसान प्रतिदिन मिट्टी व पानी की जांच के लिए लैब आते हैं। यहां पुरानी हो चुकी मशीन में एक साथ सभी तत्वों की जांच करना संभव नहीं है। जिसकी वजह से फसल कटाई के दौरान जांच में समय अधिक लगता है। साथ ही लैब संचालकों को भी कई समस्याओं से गुजरना पड़ता है। लेकिन अब नई मशीन मिलने के बाद एक साथ सभी जांच संभव हो जाएगी तो लैब संचालकों को पर्याप्त समय मिल पाएगा। साल भर में पानी के करीब 1500 व मिट्टी के 2000 सैंपल जांच के लिए आते हैं। नई मशीन में 7 से 8 घंटे में 400 सैंपल जांच करने की क्षमता होगी। वहीं पुरानी मशीन में यह सुविधाएं न होने की वजह से करीब 100 सैंपल की ही जांच हो पाती है।
12 प्रकार के तत्वों की होती है जांच
मिट्टी में पीएच, पीसी, फास्फोर्स, सल्फर, पोटाश, जिंक व ऑर्गनिक कार्बन, बोरोन, आयरन व कॉपर जैसे करीब 12 तत्वों की जांच की जाती है। वहीं पानी में काला शोरा व नमक की मात्रा का पता किया जाता है।
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मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की घट रही मात्रा
जांच में पाया जा रहा है कि इस समय मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा घट रही है। यह चिंता कोई सीमित कृषि क्षेत्र की नहीं रह गई बल्कि जिले भर की कृषि भूमि में देखी जा रही है। इसकी मुख्य वजह है गोबर व हरी खाद खेतों में न डाला जाना। क्योंकि किसान इन खादों की बजाय रासायनिक खाद का ही प्रयोग अधिक कर रहे हैं। जिसके कारण नाइट्रोजन व जिंक की मात्रा बढ़ चुकी है। हालांकि उत्तम खेती के लिए सभी पोषक तत्वों की आवश्यकता पड़ती है।
तय पैमाना बढ़ने के बाद नहीं कोई समाधान
जांचकर्ता मुकुल मेहता ने बताया कि पानी में काला शोरा की मात्रा 0.1.5 तक पहुंचने पर कुछ समाधान किया जा सकता है। लेकिन इसकी मात्रा 2.5 तक पहुंच जाने पर समाधान की संभावना समाप्त हो जाती है। क्योंकि कम मात्रा हो तो जिप्सम की सहायता से कंट्रोल किया जा सकता है।
नई मशीन मिलने से किसानों को काफी लाभ होगा। जांच करने की क्षमता भी बढ़ेगी। किसानों से आग्रह है कि वे समय-समय पर मिट्टी व पानी की जांच करवाएं। ताकि किसानों का आर्थिक नुकसान कम हो। क्योंकि इनकी जांच के बाद ही पता चलता है कि भूमि में किन उर्वरकों की आवश्यकता है।
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-महावीर सिंह, मिट्टी व पानी जांच अधिकारी।
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