संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। जिले में कपास की फसल में गुलाबी सुंडी का प्रकोप देखने को मिल रहा है। किसानों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर एसडीओ व उनकी टीम ने सर्वे कर रिपोर्ट विभाग को सौंपी है। रिपोर्ट के अनुसार डबवाली और चोपटा इलाके में 50 से 75 प्रतिशत के बीच कपास की फसल में गुलाबी सुंडी का प्रकोप पाया गया। कई गांव बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अब इसके आधार पर डिटेल रिपोर्ट बनाई जा रही है।
हालांकि कृषि वैज्ञानिक निरंतर इन गांवों का निरीक्षण कर किसानों को दवाओं के बारे में जानकारी दे रहे हैं। उसके बावजूद कई गांवों में गुलाबी सुंडी का ज्यादा असर देखने को मिल रहा है। सर्वे रिपोर्ट के बाद सरकार की ओर से गिरदावरी करवाने को लेकर आदेश जारी किए जाएंगे। सरकार के आदेशों के बाद ही कितना रकबा खराब हुआ है और उसमें कितना नुकसान किसान को हुआ है, उसका आकलन किया जाएगा। उस रिपोर्ट के बाद सरकार किसानों को मुआवजा देने का कार्य करेगी।
सर्वे में लिया गया है यह पैमाना
गुलाबी सुंडी के सर्वे को चार आधार पर जांचा गया है। इसमें 0 से 25 प्रतिशत, 25 से 50 प्रतिशत, 50 से 75 प्रतिशत , 75 से 100 प्रतिशत नुकसान की रिपोर्ट तैयार की गई है।
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50 से 75 प्रतिशत में आने वाले मुख्य गांव
- डबवाली के कालुआना, गंगा, गोरिवालां, गोदिका, अबूबशहर, तेजा खेड़ा, चौटाला।
- चोपटा के नहराणा, चाहरवाला, रूपावास, जमाल
कपास का रकबा
देसी - 2566 हेक्टेयर
बीटी कपास - 199289 हेक्टेेयर
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गुलाबी सुंडी से फसल में कितना नुकसान, ऐसे करें पता
अधिकारियों के अनुसार गुलाबी सुंडी एक एकड़ में कितनी है और फसल को कितना नुकसान हुआ है, इसका प्रतिशत निकालने का आसान तरीका कपास अनुसंधान के वैज्ञानिक बताते हैं। उनके अनुसार आप अपने खेत से कपास के 20 टिंडे तोड़कर जांचे की कितने खराब है। दो या तीन खराब हैं तो वैज्ञानिक दवा करने को कहता है। खराब टिंडों की संख्या जितनी ज्यादा होगी, उसके आधार पर कपास में नुकसान का पता लगेगा। अधिकारियों का कहना है कि कुछ इलाके में किसान चुगाई करवा चुके हैं।
कोटस
सभी एसडीओ से रिपोर्ट मिली है। इसके आधार पर डिटेल रिपोर्ट बनाई जा रही है। सबसे ज्यादा गुलाबी सुंडी का असर डबवाली व चोपटा इलाके में मिला है। 50 से 75 प्रतिशत के बीच फसलों में गुलाबी सुंडी का प्रकोप है। - डा. जोगिंदर राणा, तकनीकी सहायक