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14 वर्षीय रुझान की अब तक तीन पुस्तकें हो चुकी प्रकाशित, अब चौथी की तैयारी

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मेडल और किताब दिखाते हुए रूझान चौधरी। - फोटो : Sirsa
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सिरसा। कुछ कर गुजरने के लिए उम्र नहीं जज्बा और पक्का मन चाहिए। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है सिरसा की बेटी रुझान चौधरी ने। साहित्यकार जीडी चौधरी की पौत्री 14 वर्षीय रुझान अभी तक 3 पुस्तकें लिख चुकी है, और फिलहाल चौथी पुस्तक लिख रही है। रुझान चौधरी को अपनी इस प्रतिभा के लिए साहित्य जगत के कई अवॉर्ड मिल चुके हैं।
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रुझान फिलहाल दसवीं कक्षा की छात्रा है। पढ़ाई के साथ-साथ ही रुझान अपने लिखने के हुनर को भी आगे बढ़ा रही है। 8 वर्ष की उम्र में रुझान की पहली पुस्तक, मैंने पंखों की उड़ान प्रकाशित हुई। उनके पिता पेशे से वकील और माता मोनिका कोर्ट में प्रोबेशन अधिकारी है। माता मोनिका ने बताया कि शुरूआत से ही उनके घर का माहौल साहित्यिक, कविताओं भरा रहा है। ससुर जीडी चौधरी एक साहित्यकार है जिसके कारण घर पर कार्यक्रम, कवि सम्मेलन जैसे प्रोग्राम होते रहते थे। जिसमें रुझान ने हमेशा दिलचस्पी दिखाई और उनमें भाग लिया।
8 वर्ष की उम्र में प्रकाशित हुई पहली पुस्तक
रुझान की 8 वर्ष की आयु में पहली पुस्तक नन्हें पंखों की उड़ान 2015 में प्रकाशित हुई। कविताओं पर आधारित इस पुस्तक में रुझान ने अपने कपोल मन की उड़ान को शब्दों में पिरोया है। दूसरी पुस्तक नॉवल द एडवेंचर ऑफ रोमिला- ए मेजिकल गर्ल 2018 लिखी है। वहीं तीसरी पुस्तक फैसिस ऑन द कैनवास 2020 में प्रकाशित हुई। रुझान फिलहाल चौथी पुस्तक पर काम कर रही है।
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साहित्यकार दादा से मिली प्रेेरणा
रुझान का कहना है कि उसके दादा जीडी चौधरी जो अभी 85 वर्ष के है बहुत अच्छे साहित्यकार रहे है। उसे लिखने की प्रेरणा उनके दादा से ही मिली है। जब दादा कुछ लिखते थे तो वह उनके साथ जाकर बैठ जाती थी और उनसे सवाल जवाब करती थी।
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अब तक कितने अवॉर्ड किए हासिल
1. इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड- 2016, यंगेस्ट ऑर्थर
2. इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड- 2019, यंगेस्ट नॉवलिस्ट
3. एशिया अवॉर्ड- 2019
4. टॉप 100 रिकॉर्ड होल्डर, वर्ल्ड यूनियन में नाम दर्ज
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