जाट आरक्षण आंदोलन का असर इस बार होली पर भी पड़ सकता है। होली में मात्र चार दिन शेष हैं लेकिन अभी बाजारों में खरीददारी ने जोर नहीं पकड़ा है। दुकानदार इसका कारण पिछले दिनों प्रदेश में हुए उपद्रव को मान रहे हैं। हालांकि बच्चे खरीददारी कर रहे हैं पर पिछले वर्षों की तुलना करें तो इस बार अब तक रंगों और पिचकारियों की बिक्री कम है। अब अगले तीन दिनों में बिक्री बढ़ने की संभावना है। होली को लेकर बाजारों में रंगों और पिचकारियों की दुकानें सज गई हैं।
होली पर्व को लेकर बाजारों में रौनक बढ़ गई वहीं विभिन्न रंगों से दुकानें सज चुकी है। इसी के साथ इस बार मार्केट में ग्राहकों को लुभाने के लिए अनेक प्रकर की पिचकारियां भी उपलब्ध है। खासकर बच्चे और किशोर खरीददारी में उत्साह दिखा रहे हैं। होली के दिन लोग पुराने मन मुटाव को भूलाकर एक-दूजे को रंग लगा कर भाईचारे को बढ़ावा देते हैं। इस बार इस पर्व का महत्व इस लिए भी बढ़ गया है क्योंकि इस पर्व से कुछ दिन पूर्व प्रदेश का भाईचारा दांव पर लग गया था।
होली पर्व को लेकर बाजारों में बच्चों के लिए इस बार अनेक प्रकार की आयटम मौजूद है। जिनमें बच्चों के लिए टैंक पिचकारी व पटाखा पिचकारी आकर्षक है। खासकर पटाखा पिचकारी खरीददारों के लिए पहली पसंद बनी हुई है, क्योंकि इसकी खास वजह है पटाखा बजने के साथ ही यह अनेक रंगों को एक साथ छोड़ती है। अवकाश के चलते शिक्षण संस्थानों में पहले ही होली मनाई जाने लगी है। शुक्रवार और शनिवार को विभिन्न शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को होली खेलते देखा गया। विद्यार्थियों ने घरों को जाने से पूर्व अपने सहपाठियों संग होली खेली।
बाजारों में होली को लेकर रंग और पिचकारियों के विभिन्न आयटम उपलब्ध हैं। रोडी गेट स्थित दुकानदार राजकुमार बांसल ने बताया कि टैंक 120 से 500 रुपये, गन 30 रुपये से लेकर 250 रुपये तक, पंप 10 रुपये से लेकर 150 रुपये तक, गुलाल 10 से 30 रुपये तक पैकेट, पटाखे वाले रंग 40 से 80 रुपये, गुबोर 5 रुपये से 20 रुपये तक, रंग की डिब्बियां 10 से 50 रुपये तक, रंग खुला 80 रुपये प्रति किलो ग्राम बेचा जा रहा है। उन्होंने बताया कि युवा वर्ग गुलाल अधिक खरीद रहा तो बच्चे पानी वाले रंगों की खरीददारी में रुचि ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस बार होली को लेकर बिक्री कम है।